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जूनागढ़ किले का इतिहास | जूनागढ़ का किला किसने बनवाया | बीकानेर दुर्ग Junagarh Fort

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बीकानेर दुर्ग, जूनागढ़ का किला कहां है Junagarh Fort

  • यह धान्वन दुर्ग की श्रेणी में है।
  • इस दुर्ग का निर्माण राती-घाटी क्षेत्र में 1485 ई. में राव बीका ने बीकाजी की टेकड़ी के नाम से करवाया।
  • इस दुर्ग का निर्माण कार्य नापोजी की देख-रेख में हुआ।
  • रायसिंह ने 30 जनवरी, 1589 ई. को इस दुर्ग का निर्माण कार्य पुनः प्रारम्भ किया जो 17 जनवरी, 1594 ई. को पूर्ण हुआ। इसके बाद इस दुर्ग को जूनागढ़ Junagarh Fort के नाम से जाने जाना लगा। रायसिंह का शिल्पी कर्मचन्द था। इस दुर्ग की आकृति चतुर्भुज प्रकार की है। जिसमें 37 बुर्ज हैं।
  • दुर्ग में प्रवेश के दो दरवाजे हैं
  1. करणपोल (पूर्वी)

इस दुर्ग में पाँच आन्तरिक दरवाजे हैं –

  1. दौलतपोल
  2. रत्नपोल
  3. पोल पोल
  4. चांदपोल (पश्चिमी)
  5. फतेहपोल
  6. सूरजपोल

सूरजपोल – सूरजपोल के आगे 1590 ई. में रायसिंह ने जयमल व फत्ता की गजारूढ़ मूर्तियाँ लगवाई। सूरजपोल पर रायसिंह प्रशस्ति उत्कीर्ण है।

नोट- इन दोनों की मृत्यु चित्तौड़ के तीसरे साके ( 1567-68 ई.) में हुई थी

  • जिस कारण अकबर ने आगरा दुर्ग के आगे इन दोनों की हाथियों पर बैठे मूर्तियां बनवायी। औरंगजेब के समय जब इन मूर्तियों को तोड़ा गया तब
  • इन्हें जूनागढ़ के आगे बनाया गया। सिलहखाना (शस्त्रागार), भोजनशाला, घुड़शाला, बारादरियां, हुजूरपोड़ी,
  • गुलाब निवास, शिव निवास, फीलखाना, भैरव चौक, कर्ण महल, घण्टाघर, जनानी ड्योढ़ी, चन्द्रमहल, फूलमहल, रायसिंह का चौबारा, अनूप महल, सरदार निवास, गंगा निवास, सूरत निवास, प्रताप निवास, लाल निवास, रतन निवास, मोती महल, रंग महल, सुजान महल, गणपत विलास, भैरव चौक, गुलाब मन्दिर, सूर मंदिर आदि प्रमुख स्थल हैं।
  • जूनागढ़ दुर्ग के बारे में कहा जाता है कि इस दुर्ग की दीवारें बोलती है। यहाँ राव बीका के चाँदी के पलंग व सिंहासन है। यहाँ स्थित महलों में मुगल शैली का प्रभाव दिखाई देता है।
  • यहाँ स्थित महलों में सोने की चित्रकारी की गई है।
  • बादल महल में बादलों का सा आभास होता है।
  • फूल महल में काँच का सुनहरा काम किया गया है।
  • छतर महल में रासलीला के दृश्य अंकित हैं।
  • गजमंदिर में रतनसिंह के समय का झूला लगा हुआ है।
  • इस दुर्ग में 33 करोड़ देवी-देवताओं की मूर्तियों का मन्दिर बना है।
  • नोट- 33 करोड़ देवी-देवताओं की साल जोधपुर में है।
  • अनुपमहल में सोने का काम किया गया है। इस महल में बीकानेर शासक का राजतिलक होता था। कर्ण महल का निर्माण अनुपसिंह ने अपने पिता कर्णसिंह की याद में करवाया।
  • घंटाघर का निर्माण महाराजा डुंगरसिंह ने करवाया।
  • रानीसर व रामसर बीकानेर दुर्ग मे दो कुएँ है।
  • • जुनागढ़ के आगे सूरसागर झील है जिसकी वसुन्धरा राजे ने मरम्मत करवाकर 15 अगस्त 2018 को नौकायन प्रारम्भ की।
  • यह राजस्थान का प्रथम दुर्ग है जिसमें लिफ्ट लगी हुई है।
  • यह दुर्ग हिन्दू-मुस्लिम शैली में बना है जिसमें 37 बुर्ज हैं।
  • सुन्दरता के कारण जूनागढ़ को जमीन का जेवर कहते हैं।
  • इस दुर्ग में हेरम्भ गणपति मन्दिर है जिसमें गणेश जी सिंह पर सवार हैं। नोट:- वाजणा गणेश सिरोही व त्रिनेत्र गणेश मन्दिर रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।
  • इस दुर्ग में 1594 ई. का संस्कृत भाषा में एक शिलालेख लिखा गया जिसे रायसिंह प्रशस्ति कहते हैं। इस प्रशस्ति में राव बीका से लेकर रायसिंह तक
  • का इतिहास है। 1937 तक इस दुर्ग में बीकानेर के शासक रहते थे। इसके बाद गंगासिंह ने
  • लाल गढ़ पैलेस का निर्माण करवाया जिससे राजपरिवार वहाँ रहने लगा। इस दुर्ग में गंगासिंह का लड़ाकू विमान 100 किलो की पोशाक, मेज, कुर्सी, मुहर, तस्वीर, घड़ियाँ, टेलिफोन, बर्तन रखे हुए हैं।
  • 1808 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारी एल्फिस्टन काबुल जा रहे थे।
  • जिन्हें बीकानेर के शासक सूरतसिंह ने दुर्ग में ठहराया तथा दुर्ग की चाबियाँ भेट की लेकिन एल्फिस्टन ने चाबियाँ लेने से मना कर दिया। प्रथम दुर्ग जिसमें लिफ्ट लगी है।
  • इसे जमीन का जेवर कहते हैं।
  • इस दुर्ग में एक संग्रहालय स्थित है जिसमें टैस्सीटोरी (इटली) ने अनेक पुरातात्विक सामग्री इकट्ठी की।
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