Educationहरित गृह प्रभाव | what is green house effect in Hindi

हरित गृह प्रभाव | what is green house effect in Hindi

हरित गृह प्रभाव किसे कहते हैं what is green house effect in Hindi

ग्रीन हाऊस / हरित गृह – ध्रुवीय क्षेत्रों में अधिकांश समय बर्फ के कारण वहाँ का तापमान अत्यंत कम होता है , अत : इन क्षेत्रों में खेती तथा पादप संवर्धन हेतु हरे काँच के घर बनाये जाते हैं । इन हरे काँच के घरों की यह विशेषता होती है , कि इनमें सूर्य से आने वाली किरणें प्रवेश तो कर जाती है लेकिन वापस बाहर नहीं निकल पाती , जिससे अंदर का तापमान बढ़ जाता है , जो कि पेड़ – पौधे एवं खेती के लिए उपयुक्त तापमान प्रदान करता है । अत : ध्रुवीय क्षेत्रों में पादप संवर्धन हेतु बनाये जाने वाले काँच के घर ग्रीन हाऊस कहलाते हैं ।

धरातल पर मनुष्य द्वारा जीवाश्मीय ईंधनों के दहन से उत्पन्न CO2 . ( कार्बन डाई ऑक्साइड) गैस पृथ्वी के चारों ओर एक ऐसी सघन परत बना दे , जो सूर्य से आने वाली लघु सौर्यिक किरणों को तो आने देती है लेकिन धरातल से टकराकर पुन : अंतरिक्ष में जाने वाली दीर्घ पार्थिव विकिरणों ( अवरक्त किरणें ) को जाने नहीं देती है , तो इससे पृथ्वी के वायुमण्डल का तापमान बढ़ने लग जाता है , जिसे हरित गृह प्रभाव ( ग्रीन हाऊस इफेक्ट) कहा जाता है और ग्रीन हाऊस प्रभाव के कारण वैश्विक स्तर पर तापमान में होने वाली वृद्धि अर्थात् पृथ्वी के वैश्विक तापन ग्लोबल वार्मिंग ( भूमण्डलीय ऊष्मीकरण ) कहलाती है ।

वैश्विक तापन के कारण जलवायु में परिवर्तन को रेडियो एक्टिव फॉरसिंग से नापा जाता है । यह अवधारणा ब्रिटिश वैज्ञानिक वालेस ब्रोएकर ( 1970 ) के द्वारा दी गई । वैज्ञानिकों का मानना है कि 21 वीं सदी के मध्य तक वातावरण में CO2 , की मात्रा औद्योगिक युग ( 1860 ) से पूर्व की तुलना में दुगुनी हो जाएगी , जिसके परिणामस्वरूप सन् 2050 तक पृथ्वी का औसत तापमान 1.5 ° से 4.5 ° सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

इन्हें भी पढ़ें – मौर्य वंश का इतिहास

प्रमुख ग्रीन हाऊस गैसों का क्रम-

CO2-60 % ,

CH4-20 % , 

CFC – 14 % ,
NO2 – 6 % एवं जल वाष्प ।
CO2 , प्रमुख ग्रीन हाऊस गैस है । ( यह प्रदूषक गैस नहीं है ) 1956 से 2002 तक CO2 , की मात्रा 280 PPm से बढ़कर 368 PPm हो गयी है ।

ग्रीन हाऊस के प्रभाव

1. ग्लोबल वार्मिंग के कारण वायुमण्डल का तापमान लगातार बढ़ रहा है , जिससे ध्रुवीय टोपियाँ व ग्लेशियर के पिघलने से समुद्री जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है ।
2.ग्लोबल वार्मिंग के कारण बाढ़ का आना ( कुछ वर्षों पहले ग्लेशियर पिघलने के कारण सिंधु नदी में काफी पानी आया , जिससे पाकिस्तान में बाढ़ आ गई ) , वर्षा चक्रण में अनियमित बदलाव एवं विभिन्न प्रकार के जीवों के आवास का क्षरण हो रहा है , जिससे जैव विविधता प्रभावित हो रही है अत : आवास का क्षरण होना , आवासीय विखण्डन ( हैबिटेट फ्रेगमेंटेशन ) कहलाता है ।

हरित गृह प्रभाव के कारण

1. औद्योगिकीकरण ,
2. जीवाश्म ईंधन ( लकड़ी एवं कोयले के दहन से )
3.वनों का विनाश व
4. रेफ्रीजरेटर तथा एयर कंडीशनर्स का प्रयोग।

हरित गृह प्रभाव के दुष्प्रभाव

इसका मुख्य दुष्प्रभाव विश्व तापमान में वृद्धि व जलवायु परिवर्तन है । इसके कारण मानसून अनियमित तथा मौसम छोटे होते जा रहे हैं । प्रतिवर्ष हिमनद 1.7 मिलीमीटर की रफ्तार से पीछे हट रहे हैं । भारत का गंगोत्री अपने मूल स्थान से 23 मीटर पीछे खिसक चुका है । विश्व का सबसे अधिक प्रदूषण करने वाला देश चीन है , तो वहीं ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के दृष्टिकोण से भारत का स्थान चौथा है ।

इन्हे भी पढ़े – बाल झड़ने के कारण व रोकने के उपाय

ग्रीन हाऊस प्रभाव कम करने के उपाय

1. जीवाश्म ईंधन का उपयोग कम करना ,

2. अधिकाधिक वृक्षारोपण करना व

3. क्लोरोफ्लोरोकार्बन के प्रयोग को रोकना।

Latest article

More article