informationसहकारिता मंत्रालय ministry of cooperative in Hindi 2021

सहकारिता मंत्रालय ministry of cooperative in Hindi 2021

सहकारिता मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय की स्थापना, सहकारिता मंत्रालय का गठन ( ministry of cooperatives in Hindi)

केंद्र सरकार ने ‘ सहकार से समृद्धि ‘ ( सहकारिता के माध्यम से समृद्धि ) के दृष्टिकोण को साकार करने और सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा देने के लिये एक अलग ‘ सहकारिता मंत्रालय ‘ ( Ministry of Co – operation ) का गठन किया ।

इस कदम से भारत सरकार ने समुदाय आधारित विकासात्मक भागीदारी के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता का संकेत दिया है । यह वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2021 में की गई बजट घोषणा को भी पूरा करता है ।

सहकारिता के बारे में

  •  अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार , सहकारिता व्यक्तियों का एक स्वायत्त संघ है जो संयुक्त स्वामित्व वाले एवं लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उद्यम के माध्यम से अपनी सामान्य आर्थिक , सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये स्वेच्छा से एकजुट होते हैं ।
  • सहकारी समितियाँ कई प्रकार की होती हैं , जैसे- उपभोक्ता सहकारी समिति ( Consumer Co – operative Society ) , उत्पादक सहकारी समिति ( Producer Co – operative Society ) , सहकारी साख समिति ( Credit Co – operative Society ) , आवास सहकारी समिति ( Housing Co – operative Society ) और विपणन सहकारी समिति ( Marketing Co – operative Society ) !
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2012 को ‘ सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष ‘ घोषित किया था।
  • भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसने विश्व के एक बड़े सहकारी आंदोलन की नींव रखी । भारत में एक सहकारिता आधारित आर्थिक विकास मॉडल बहुत प्रासंगिक है जहाँ प्रत्येक सदस्य जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करता है ।

सहकारिता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  •  97 वें संविधान संशोधन अधिनियम , 2011 के द्वारा भारतीय संविधान में एक नया भाग IXB जोड़ा गया ।
  • संविधान के भाग- III के अंतर्गत अनुच्छेद 19 ( 1 ) ( c ) में ‘ संघ ( Association ) और संगम ( Union ) ‘ के बाद ‘ सहकारी समिति ‘ ( Co – operative Societies ) शब्द जोड़ा गया था । यह सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार का दर्जा देकर सहकारी समितियाँ बनाने में सक्षम बनाता है । [ 97 वें संविधान संशोधन अधिनियम , 2011 द्वारा अंत : स्थापित ]
  • भारत के संविधान में भाग IV के तहत राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों में ‘ सहकारी समितियों के उन्नयन के संबंध में एक नया अनुच्छेद 43B जोड़ा गया था ।

भारत में सहकारी आंदोलन

स्वतंत्रता पूर्व भारत में सहकारी आंदोलन

  •  सहकारिता की शुरुआत सबसे पहले यूरोप में हुई थी और भारत में ब्रिटिश सरकार में विशेष रूप से साहूकारों के उत्पीड़न से गरीब किसानों के दुखों को कम करने के उद्देश्य से इसे अपनाया गया ।
  • ‘ सहकारी समिति ‘ शब्द तब अस्तित्व में आया जब पुणे और अहमदनगर ( महाराष्ट्र ) के किसानों ने साहूकारों के खिलाफ एक आंदोलन चलाया जो किसानों से अत्यधिक ब्याज दर वसूल रहे थे ।
  •  अंततः ब्रिटिश सरकार ने किसानों की स्थिति को समझा और आगे चलकर तीन अधिनियम दक्कन कृषि राहत अधिनियम ( 1879 ) , भूमि सुधार ऋण अधिनियम ( 1883 ) और कृषक उधार अधिनियम ( 1884 ) पारित किये । वर्ष 1903 में बंगाल सरकार के सहयोग से बैंकिंग में पहली सहकारी साख समिति का गठन किया गया था । इसे ब्रिटिश सरकार के फ्रेंडली सोसाइटीज़ एक्ट ( Friendly Societies Act ) के तहत पंजीकृत किया गया था ।
  •  किंतु सहकारी साख समिति अधिनियम , 1904 के अधिनियमन ने सहकारिता को एक निश्चित संरचना एवं आकार प्रदान किया ।
  • वर्ष 1919 में , सहकारिता एक प्रांतीय विषय बन गया और प्रांतों को मॉटेग्यू – चेम्सफोर्ड सुधारों के तहत अपने स्वयं के सहकारी बनाने हेतु अधिकृत किया गया था ।
  • वर्ष 1942 में ब्रिटिश भारत सरकार ने एक से अधिक प्रांतों की सदस्यता वाली सहकारी समितियों को कवर करने हेतु बहु – इकाई सहकारी समिति अधिनियम बनाया ।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सहकारी आंदोलन

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सहकारिता पंचवर्षीय योजनाओं का एक अभिन्न अंग बन गई ।

  •  वर्ष 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद ( NDC ) ने सहकारी कर्मियों के प्रशिक्षण एवं सहकारी विपणन समितियों की स्थापना के लिये सहकारिता पर एक राष्ट्रीय नीति की सिफारिश की थी ।
  •  राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम , 1962 के ‘ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ( NCDC ) के रूप में एक सांविधिक निकाय की स्थापना की गई ।
  •  वर्ष 1984 में भारत की संसद द्वारा एक ही प्रकार के समाज को शासित करने वाले विभिन्न कानूनों को समाप्त करने हेतु बहु – राज्य सहकारी समिति अधिनियम को लागू किया गया।
  •  वर्ष 2002 में , सरकार ने सहकारी समितियों के प्रचार एवं विकास का समर्थन करने के लिये सहकारिता पर एक राष्ट्रीय नीति की घोषणा की । जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना और सहकारी शिक्षा , प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास को मजबूत करना है ।
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  • डचों का भारत में आगमन 
  •  सामाजिक विकास (Social development during infancy)

Q.1 सहकारी समितियां कितने प्रकार की होती है।

सहकारी समितियाँ कई प्रकार की होती हैं , जैसे- उपभोक्ता सहकारी समिति ( Consumer Co – operative Society ) , उत्पादक सहकारी समिति ( Producer Co – operative Society ) , सहकारी साख समिति ( Credit Co – operative Society ) , आवास सहकारी समिति ( Housing Co – operative Society ) और विपणन सहकारी समिति ( Marketing Co – operative Society )

Q.2 सहकारिता कौन सी सूची का विषय है?

वर्ष 1919 से , सहकारिता एक प्रांतीय विषय है।

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