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शैवाल क्या है परिभाषा, आवास, प्रकृति, लक्षण, इतिहास | What is Algae Definition, Habitat, Nature, Characteristics, History

शैवाल क्या है, शैवाल के लक्षण, शैवाल की विशेषता, शैवाल का वर्गीकरण [What is Algae Definition, Habitat, Nature, Characteristics, History]

शैवाल Algae थैलोफाइटा का उप समूह है शैवाल शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के अल्गा से हुआ है इसका अर्थ समुद्री खरपतवार, शैवाल जलीय, समुद्रीय, चट्टानों, पेड़ की छालो, मृदा आदि स्थानों पर पाया जाता है इनमें भ्रुण व संवहन तंत्र अनुपस्थित होता है।

शैवाल के लक्षण symptoms of algae

उनकी उत्पत्ति कैंब्रियन काल में हुई थी शैवाल के लक्षण निम्न है

  1. अधिकतर शैवालों की जातियां जल में पाई जाती है
  2. सभी शैवाल में वर्णक पाई जाती है
  3. इनका शरीर सुकाय प्रकार का होता है
  4. संवहनी तंत्र नहीं होता है।
  5. कोशिका भित्ति अधिकतर सैलूलोज की बनी होती है।
  6. संचित खाद्य पदार्थ मंड, तेल, प्रोटीन, वसा होते हैं
  7. शैवाल में प्रजनन कायिक, अलैंगिक व लैंगिक प्रकार का होता है
  8. अलैंगिक जनन चल अथवा अचल बीजाणुओ द्वारा संपन्न होता है
  9. अलैंगिक जनन समयुग्मकी, असमयुग्मकी, विषमयुग्मकी प्रकार का पाया जाता है।

शैवालो का इतिहास History of algae

भारतीय आयुर्वेद ग्रंथों में भी शैवालों का वर्णन मिलता है और हवाई दीप के लोग खाने के रूप में उपयोग करते थे 1753 में लीनियस ने शैवाल शब्द का प्रयोग किया और शैवाल को ब्रायोफाइटा से अलग Al De jussiaue ने किया, एम आयंकर को भारतीय शैवाल विज्ञान का जनक कहते हैं।

शैवाल का आवास algae habitat

शैवाल जल तथा स्थलों में पाए जाते हैं एवं उच्च तापमान, बर्फीले स्थान, अलवणीय, लवणीय आवासों में वृद्धि कर सकते हैं। शैवालों के सदस्य प्रायः जल अथवा जलयुक्त नमी वाले स्थानों पर पाये जाते है।

शैवाल की प्रकृति nature of algae

शैवाल की प्रकृति निम्न प्रकार से होती है

  1. प्लावक – जल की सतह पर मुक्त रूप से तैरते हैं
  2. भौम शैवाल- यह जमीन में कुछ गहरे अथवा सतह के ऊपर पाए जाते हैं
  3. नितलीय शैवाल- यह शैवाल जल के तल पर उपस्थित भूमि में रहते हैं।
  4. मृतोपजीवी शैवाल- यह जमीन के अंदर पाए जाते हैं यह भोजन के लिए मृत कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रखते हैं eg यूग्लीना
  5. परजीवी शैवाल– यह अन्य पादपों में वृद्धि करते हैं।
  6. अधिपादप- शैवाल यह पादपों की सतहो पर रहते हैं
  7. अधिजान्तवी– शैवाल यह जंतुओं की बाह्य सतहो पर पाये जाते हैं।
  8. अन्त: पादपी शैवाल- यह शरीर के अंदर निवास करते है
  9. सहजीवी- यह दूसरे जीवो को लाभ पहुंचाते हैं।
  10. शैलोदभिद– यह शैवाल शैलो पर या अन्दर पाए जाते हैं।

शैवाल और कवको में समानता

  • दोनों में सरल सुकाय होता है
  • जड़ तना पत्ती में विभेदित नहीं होती है।
  • दोनों जलीय होते हैं
  • अनुकूलन परिस्थितियों में बीजाणु ओ द्वारा जनन होता है
  • प्रजनन अंग एक कोशिकीय व बिना बन्ध्य जैकेट के पाए जाते हैं
  • निषेचन के बाद युग्मनज बनता है।
  • भ्रुण निर्माण अनुपस्थित होता है

शैवाल और ब्रायोफाइटा में समानता

  • हरा सुकाय होता है
  • कोशिका भित्ति सैलूलोज से निर्मित होती है
  • भोजन स्टार्च के रूप में होता है
  • चल जनन कोशिकाएं उपस्थित होती है
  • जनन के लिए जल आवश्यक होता है

शैवाल की ब्रायोफायटा से विभिन्नतायें (Dissimilarities of Algae with Bryophyte)

शैवाल की ब्रायोफायटा से विभिन्नतायें
शैवाल बायोफायटा
अधिकतर सदस्य जलीय अधिकतर सदस्य स्थलीय
एक से बहुकोशिकीय सुकाय सुकाय बहुकोशिकीय
सभी सदस्यों में ऊतक विभेदन लगभग अनुपस्थित सभी सदस्यों में ऊतक विभेदन उपस्थित
अनियमित प्रकार का शाखन द्विभाजी प्रकार का शाखन
रन्ध्र अनुपस्थित रन्ध्र उपस्थित
क्रोमेटोफोर में वर्णक की संख्या तथा संगठन निश्चित नहीं होता क्रोमेटोफोर में वर्णक का सुस्पष्ट संगठन उपस्थित
पादप में वृद्धि आधारीय व शीर्ष कोशिका के अतिरिक्त सभी कोशिकाओं के द्वारा हो सकती हैं केवल शीर्षस्थ कोशिका वृद्धि में सहायक
जनन कायिक, अलैंगिक व लैंगिक होता है कायिक व लैंगिक जनन पाया जाता है

 

शैवाल की कवक से विभिन्नतायें (Dissimilarities of Algae with Fungi)

शैवाल की कवक से विभिन्नतायें
शैवाल कवक
स्वपोषी, जलीय कभी-कभी परपोषी अथवा स्थलीय होते हैं विषमपोषी, परपोषी अथवा मृतोपजीवी
वृद्धि के लिए प्रकाश आवश्यक होता है वृद्धि के लिए प्रकाश बहुत जरूरी नहीं
कोशिका भित्ति सैल्यूलोज की बनी होती है कोशिका भित्ति कवकीय सैल्यूलोज से निर्मित होता है
भोजन अधिकतर मंड के रूप में संचित होता है भोजन वसा, तैल अथवा ग्लाइकोजन के रूप में संचित होता है
क्रोमेटोफोर उपस्थित क्रोमेटोफोर अनुपस्थित
लैंगिक जनन समयुग्मकी से विषमयुग्मकी प्रकार का लैंगिक जनन आद्य (primitive) सदस्यों में पाया जाता है
आर्थिक रूप से अधिकतर फायदेमंद आर्थिक रूप से अधिकतर नुकसानदायक

 

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