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लसीका किसे कहते हैं, लसीका के कार्य What is lymph, functions of lymph

लसीका किसे कहते हैं, लसीका की संरचना तथा कार्य[What is lymph, structure and function of lymph]

लसीका किसे कहते हैं-रक्त केशिकाएँ ( blood capillaries ) शरीर के प्रत्येक अंग तथा ऊतक तक नहीं पहुँच पाती हैं , सिर्फ प्लाज्मा और श्वेताणु रक्त कैशिकाओं की दीवार (जो एण्डोथिलियम स्तर से बनी होती है) में से छनकर ऊतक कोशिकाओं के बीच के स्थान में पहुँच जाते हैं, यही छना हुआ द्रव लसीका (Lymph) कहलाता है।

लसीका का रासायनिक संगठन रक्त प्लाज्मा के समान ही होता है किन्तु इसमें घुले हुए पदार्थों की सान्द्रता भिन्न होती है इस तरल भाग में पोषक तत्व, अपशिष्ट पदार्थ , आयन्स , गैस एवं हारमोन्स आदि होते हैं । इन पदार्थों का आदान – प्रदान ऊतकों व अंगों की कोशिकाओं के मध्य लसीका के माध्यम से होता है ।

लसीका ऊतक द्रव्य का तथा ऊतक द्रव्य , रुधिर प्लाज्मा का अंश होता है ।

लसीका का परिसंचरण लसीका तन्त्र ( Lymphatic system ) द्वारा होता है । इस तन्त्र को सहायक या दूसरा परिसंचरण तन्त्र कहते हैं । यह तन्त्र लसीका केशिकाओं ( Lymph Capillaries ) , लसीका वाहिनियों ( Lyumph Vessels ) , लसीका गांठें ( Lymph Nodes ) व अन्य लसीका अंगों ( Lymph organs ) का बना होता है ।

(1) लसीका केशिकाएँ (Lymph Capillaries)

ये अत्यन्त कोमल व महीन दीवार की बनी होती हैं जो नेत्र का कॉर्निया , त्वचा की अधिचर्म , बालों , प्लीहा , उपास्थि , अस्थिमज्जा , मस्तिष्क व मेरुरज्जु के अलावा अन्य सभी अंगों में जाल के रूप में पाई जाती हैं । आंत्र के रसांकुर ( Villi ) में इनकी अन्तिम शाखायें आक्षीर वाहिनियाँ ( Lacteals ) कहलाती हैं । इनके द्वारा वसा का अवशोषण किया जाता है । इसके कारण लसीका का रंग दूधिया हो जाता है ।

(2) लसीका वाहिनियाँ (Lymph Vessels)

लसीका केशिकाएँ परस्पर संयोजित होकर लसीका वाहिनियाँ बनाती हैं । ये संरचना में शिरा ( Vein ) के समान होती हैं , केवल दीवारें अपेक्षाकृत पतली होती हैं । इसके भीतर भी हृदय की ओर , शिराओं की भाँति एकतरफा कपाट ( Valve ) अपेक्षाकृत अधिक होते हैं । लसीका वाहिनियाँ परस्पर मिलकर दो बड़ी ( बायीं वक्षीय व दायीं वक्षीय लसीका वाहिनियाँ ) लसीका वाहिनियाँ बनाती हैं । दायीं लसीका वाहिनी अपेक्षाकृत छोटी होती है । इसमें सिर , ग्रीवा व वक्ष के दायें भाग की तथा दायें हाथ की लसीका वाहिनियाँ खुलती हैं । यह दाहिनी सबक्लेवियन शिरा ( Subclavian Vein ) में खुलती है ।

इसी प्रकार बायीं लसीका वाहिनी भी बायीं सबक्लेवियन शिरा में खुलती है । यह वाहिनी डायफ्राम के पीछे स्थित एक बड़ी थैलीनुमा सिस्टर्ना काइली ( Cisterna Chyli ) से जुड़ी रहती है । सिस्टर्ना काइली को शरीर का द्वितीयक हृदय ( Second Heart ) कहते हैं ।

(3) लसीका पर्व संधि (Lymph Nodes)

लसीका वाहिनियों में जगह – जगह लसीका गांठें ( Lymph nodes ) स्थित होती हैं । इन गांठों में लसीकाणुओं ( Lymphocytes ) का निर्माण होता है । लसीकाणु अथवा लिम्फोसाइटस प्रतिरक्षा का कार्य करते हैं । लसीका गांठें सिर , गर्दन , बगलों , रानों ( Groin ) आदि में बड़ी रुधिर वाहिनियों के समीप स्थित होती हैं । टॉन्सिल्स ( Tonsils ) भी लसीका गांठें हैं ।

लसीका का परिसंचरण (Circulation of Lymph)

लसीका का बहाव अंगों से हृदय की तरफ होता है । इस बहाव के निम्न बल उत्तरदायी होते हैं-

( i ) भित्ति की पेशियों में संकुचन

( ii ) आन्तरांगों की पेशियों का दबाव

( iii ) कपाटों की उपस्थिति ।

लसीका तंत्र का कार्य (Function of Lymphatic Sys tem)

लसीका रक्त व ऊतकों के मध्य मध्यस्थ ( Middleman ) का कार्य करता है । यह रक्त से पचित भोज्य पदार्थों व 02 को लेकर ऊतकों को तथा ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों , हार्मोन को लेकर रक्त में देता है । लसीका तंत्र अवशोषित पोषक पदार्थों विशेष रूप से वसा (ग्लिसरॉल एवं वसा अम्लों) के परिवहन में सहायक है ।

आन्त्र में अवशोषित वसा लेक्टियल या क्षीर वाहिकाओं ( Lecteals ) के माध्यम से पहले लसीका तंत्र में जाती है और वहाँ से शिरातंत्र में जाती है । लसीका में उपस्थित श्वेत रुधिर कणिकायें रोगाणुओं का भक्षण करती हैं । लसीका तन्त्र एक अतिरिक्त तन्त्र है जो शिरीय तन्त्र का सम्पूरक है

लसीका रुधिर
इसमें CO2 की मात्रा अधिक होती है इसमें CO2 की मात्रा कम होती है
इसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है इस में ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होती है
इसमें उपापचय पदार्थ अधिक होते हैं इसमें उपापचय पदार्थ अपेक्षाकृत कम होते हैं
अविलेय प्रोटीन अधिक होती है इसमें विलेयशील प्रोटीन अधिक होती है
इसमें RBC अनुपस्थित होती है इसमें RBC उपस्थित होती है
इसमें WBC अधिक होती है WBC की संख्या सामान्य होती है
इसमें लिंफोसाइट संख्या में अधिक होती है । इसमें न्यूट्रोफिल्स की संख्या अधिक होती है
इसमें पोषक पदार्थ कम होते हैं इसमें इनकी मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।
यह लसीका तंत्र का निर्माण करता हैं यह परिवहन तंत्र का निर्माता करता है।

 

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