Educationराष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) NATIONAL AYUSH MISSION IN HINDI

राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) NATIONAL AYUSH MISSION IN HINDI

राष्ट्रीय आयुष मिशन क्या है, राष्ट्रीय आयुष मिशन की शुरुआत कब हुई,

प्रस्तावना

आयुष विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वयन के लिए 12वीं योजना के दौरान राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) आरम्भ किया है। एनएएम का मूल उद्देश्य लागत प्रभावी आयुष सेवाओं के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना, शिक्षण प्रणाली को सुदृढ करना, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (एएसयू एवं एच) औषधों के गुणवत्ता नियंत्रण के प्रवर्तन को सुविधाजनक बनाना और एएसयू एवं एच की कच्ची सामग्री सतत रूप से उपलब्ध कराना है। इसमें कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की नम्यता परिकल्पित है जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। एनएएम एक राष्ट्रीय मिशन और तदनुरूपी राज्य स्तर पर मिशनों की स्थापना का विचार रखता है। एनएएम से स्कीमों की योजना, पर्यवेक्षण और निगरानी के संबंध में विभाग दवारा सेवाओं की पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार होने की आशा है।

परिदृश्य

क. सेवाओं तक पहुंच में सुधार दवारा पूरे देश में लागत प्रभावी और साम्यिक आयुष स्वास्थ्य परिचय प्रदान करना।

ख. आयुष पद्धतियों को पुनर्जीवित और सुदृढ करना जिससे वे समाज की स्वास्थ्य परिचर्या में प्रमुख चिकित्सा पद्धति बन जाएं।

ग. गुणवत्तायुक्त आयुष शिक्षा प्रदान करने में सक्षम शैक्षणिक संस्थानों में सुधार करना।

घ. आयुष औषधों के गुणवत्ता मानक अपनाने को बढ़ावा देना और आयुष संबंधी कच्ची सामग्री की सतत आपूर्ति की उपलब्धता करवाना।

मिशन के उद्देश्य

क. आयुष अस्पतालों और औषधालयों के उन्नयन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं की सह स्थापना दवारा सार्वभौमिक पहुंच सहित लागत प्रभावी आयुष सेवाएं प्रदान करना।

ख. आयुष शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकार की एएसयू एवं एच भेषजियों, औषध परीक्षण प्रयोगशालाओं और एएसयू एवं एच प्रवर्तन तंत्र के उन्नयन के माध्यम से राज्य स्तर पर संस्थागत क्षमता सुदृढ़ करना।

ग. उत्तम कृषि पद्धतियों (जीएपी) को अपनाकर औषधीय पादपों की कृषि में सहायता प्रदान करना ताकि गुणवत्तायुक्त कच्ची सामग्री की सतत आपूर्ति हो और गुणवत्तायुक्त मानकों, उत्तम कृषि/संग्रहण/भंडारण पद्धतियों के लिए प्रमाणन तंत्र का समर्थन करना।

घ. खेती, भांडागारण, मूल्य संवर्धन और विपणन के अभिसरण द्वारा समूहों की स्थापना में सहायता और उदयमियों के लिए अवसंरचना का विकास।

मिशन के घटक

क. अनिवार्य घटक

  1. आयुष सेवाएं
  2. आयुष शैक्षणिक संस्थान
  3. एएसयू एवं एच औषधों का गुणवत्ता नियंत्रण
  4. औषधीय पादप

ख. नम्य घटक

1. कुल उपलब्ध राज्य निधियों में से 20 प्रतिशत निधियां नम्य घटकों के लिए निर्धारित की जाएंगी जिसे नीचे दिये गए किसी भी मठ पर खर्च किया जा सकता है बशर्त ऐसे घटकों पर समग्र राज्य निधि का 5 प्रतिशत से अधिक का व्यय न किया गया हो।

  1. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा  सहित आयुष स्वास्थ्य केन्द्र
  2. टेली-मेडिसीन
  3. आयुष के माध्यम से खेल चिकित्सा
  4. सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित आयुष में नवाचार
  5. निजी आयुष शैक्षणिक संस्थाओं के लिए ब्याज सब्सिडी घटक
  6. परीक्षण प्रभारों की प्रतिपूर्ति
  7. आईईसी कार्यकलाप
  8. औषधीय पादपों से संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास स्वैच्छिक प्रमाणन स्कोम- परियोजना आधारित
  9. बाजार संवर्धन, बाजार ज्ञान और वापस खरीद हस्तक्षतेप
  10. औषधीय पादपों के लिए फसल बीमा

* योग स्वास्थ्य केंद्र प्रारंभिक साज सामान के लिए 0.6 लाख रूपए की एकमुश्त सहायता के पात्र हैं तथा श्रमशक्ति रखरखाव इत्यादि के लिए प्रतिवर्ष 5.4 लाख रूपए की आवर्ती सहायता के पात्र हैं और 20-30 बिस्तर वाले प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल 15 लाख रूपये की एकमुश्त सहायता के पात्र हैं (श्रमशक्ति सहित आवर्ती सहायता के रूप में प्रतिवर्ष 12 लाख रुपये तथा उपचार उपकरणों के लिए 3 लाख रूपए के एकमुश्त अनावर्ती सहायता) तथापि, किसी भी घटक पर नियत निधि का 5% से अधिक खर्च न करने की व्यवस्था की शर्त इस घटक पर लागू नहीं होगी I

2. संविदात्मक कार्यों, अवसंरचना विकास, क्षमता निर्माण और औषधियों की आपूर्ति के रूप में भारत सरकार से वित्तीय सहायता पूरक होगी जो आयुष विभाग दवारा प्रदान की जाएगी। इससे प्रभावशाली समन्वय और निगरानी के जरिये कार्यक्रम का बेहतर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा। राज्य मौजूदा सुविधाओं में सभी नियमित जनशक्ति पदों को भरने का कार्य सुनिश्चित करें। औषधियों का प्रापण स्कीम के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों दवारा किया जाएगा।

संस्थागत तंत्र

1. राष्ट्रीय  स्तर

मिशन निदेशालय

क. राष्ट्रीय स्तर पर मिशन राष्ट्रीय आयुष मिशन निदेशालय द्वारा शासित किया जाएगा जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे।

1. सचिव (आयुष)- अध्यक्ष

2. अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार अथवा उनके प्रतिनिधि – सदस्य

3. ए एस एवं प्रबंध निदेशक, एनआरएचएम, स्वास्थ्य विभाग – सदस्य

4. सीईओ, राष्ट्रीय औषधीय पादप  बोर्ड – सदस्य

5. मिशन निदेशक , बागवानी- सदस्य

6. एएसयू एवं एच औषधों/संस्थाओं का कार्य संभाल रहे संयुक्त सचिव – सदस्य

7. एएसयू एवं एच औषधों के औषध महानियंत्रक/डीसीसी का कार्य संभाल रहे वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी – सदस्य

8. आयुर्वेद, होमियोपैथी, यूनानी, सिद्ध के सलाहकार- सदस्य

9. सीएसएस के प्रभारी संयुक्त सचिव (एनएएम के पदेन मिशन निदेशक)- सदस्य सचिव

ख. अध्यक्ष के अनुमोदन से जैसा आवश्यक समझा जाए किसी अन्य विशेषज्ञ को सहयोजित किया जा सकता है। यह समिति मूल्यांकन समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्य वार्षिक कार्ययोजना (एसएएपी) का अनुमोदन करने के लिए जिम्मेदार होगी।

मल्यांकन समिति

राष्ट्रीय स्तर पर

मिशन की सुविधा के लिए एक राष्ट्रीय आयुष मिशन मूल्यांकन समिति होगी जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे।

1. एनएएम के प्रभारी संयुक्त सचिव -अध्यक्ष

2. एएसयू एवं एच औषधों/संस्थाओं का कार्य संभाल रहे संयुक्त सचिव-सदस्य

3. सीईओ/उप सीईओ, एनएमपीबी सदस्य

4. मिशन निदेशक, बागवानी अथवा उनके प्रतिनिधि- सदस्य

5 .एनआरएचएम, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि – सदस्य

6. आईएफडी के प्रतिनिधि- सदस्य

7. एएसयू एवं एच औषधों के अपर औषध महानियंत्रक/ डीसीसी का कार्य संभाल रहे वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी – सदस्य

8. आयुर्वेद, होमियोपैथी, यूनानी, सिद्ध और औषधीय पादपों के सलाहकार/संयुक्त सलाहकार/उप सलाहकार – सदस्य

9 .एनएएम के प्रभारी निदेशक /उप सचिव – सदस्य सचिव

घ. अध्यक्ष के अनुमोदन से जैसा आवश्यक समझा जाए किसी अन्य विशेषज्ञ को सहयोजित किया जा सकता है। यह समिति राज्य वार्षिक कार्ययोजना (एसएएपी) के मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार होगी और इसे अनुमोदन के लिए शासी निकाय को प्रस्तुत करेगी।

राज्य स्तर

राज्य स्तर पर मिशन राज्य आयुष मिशन सोसाइटी, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे, दवारा शासित एवं निष्पादित किया जाएगा ।

क. शासी निकाय का गठन

1. प्रमुख सचिव – अध्यक्ष

2. आयुष/(स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) के प्रभारी प्रधान सचिव/सचिव- सदस्य –सचिव

3. प्रधान सचिव/सचिव (आयुष चिकित्सा शिक्षा)- सदस्य

4. प्रधान सचिव (वित्त) – सदस्य

5. प्रधान सचिव (योजना)- सदस्य

6 . औषधीय पादपों  का कार्य संभाल रहे प्रधान सचिव, वन एवं बागवानी – सदस्य

7.  मिशन निदेशक, एनआरएचएम – सदस्य

8. आयुक्त (आयुष)/महानिदेशक (आयुष)/निदेशक आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध – सदस्य

9. नोडल अधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड – सदस्य

10 .राज्य एएसयू एवं एच औषध लाइसेंसिंग प्राधिकरण- सदस्य

ख. अध्यक्ष के अनुमोदन से जैसा आवश्यक समझा जाए किसी अन्य विशेषज्ञ को सहयोजित किया जा सकता है।

ग. सामान्य कार्य-

आयुष पद्धतियों का अवलोकन करना, आयुष नीति एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन की समीक्षा, अंतरक्षेत्रीय समन्वय, आयुष परिदृश्य के सवंर्धन के अपेक्षित उपायों का सुझाव देना और राज्य वार्षिक कार्य योजना का अनुमोदन।

घ. कार्यकारी निकाय का गठन

1. आयुष/(स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) के प्रभारी प्रधान सचिव/सचिव –अध्यक्ष

2. प्रधान सचिव/सचिव (आयुष चिकित्सा शिक्षा) – उपाध्यक्ष

3. आयुक्त (आयुष)/महानिदेशक (आयुष)/निदेशक आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध – सदस्य सचिव

4. मिशन निदेशक, एनआरएचएम – सदस्य

5. राज्य वित्त/योजना विभाग का प्रतिनिधि- सदस्य

6. वन एवं बागवानी विठ्ठभाग के प्रतिनिधि- सदस्य

7. नोडल अधिकारी, राज्य औषधीय पादप  बोर्ड –सदस्य

8. एएसयू एवं एच औषध लाइसेंसिंग प्राधिकरण- सदस्य

9. आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पादपों का कार्य संभाल रहे वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी- सदस्य

10 .राज्य आयुष कार्यक्रम प्रबंधक – सदस्य

ड. अध्यक्ष के अनुमोदन से जैसा आवश्यक समझा जाए किसी अन्य विशेषज्ञ को सहयोजित किया जा सकता है।

च. सामान्य कार्य-

मिशन के विस्तृत व्यय और क्रियान्वयन की समीक्षा, राज्य वार्षिक कार्य योजना तैयार करना और उसे शासी निकाय के अनुमोदन के लिए भेजना, वार्षिक कार्य योजना के अनुसार निधियों की निर्मुक्ति सहित अनुमोदित राज्य वार्षिक कार्य योजना का निष्पादन, शासी निकाय के निर्णय पर अनुवर्ती कार्रवाई, निगरानी और मूल्यांकन और सोसाइटी के लेखों का अनुरक्षण और सोसाइटी का प्रशासन।

मिशन के अंतर्गत सहायक सुविधाएं

  • केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर आयुष अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कार्यक्रम प्रबंधन एकांशों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पीएमयू में केंद्रीय और राज्य दोनों स्तर के प्रबंधळन और तकनीकी व्यावसायिक शामिल होंगे और यह अनिवार्यता संविदा अथवा सेवा प्रदाता के माध्यम से होगी।
  • पीएमयू स्टॉफ संविदात्मक आधार पर खुले बाजार अथवा बाहय संसाधनों से संलग्न किया जाएगा और उनके वेतन पर व्यय, मिशन अवधि के लिए स्वीकार्य प्रशासनिक और प्रबंधकीय लागत में से पूरा किया जाएगा। यह पीएमयू एमबीए, सनद-लेखाकार, लेखा और तकनीकी विशेषज्ञ आदि जैसे कुशल व्यावसायिकों के अपने समूह के माध्यम से राज्य में राष्ट्रीय आयुष मिशन के क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। सभी नियुक्तियां संविदात्मक आधार पर होंगी और केंद्रीय सरकार का दायित्व मिशन अवधि के लिए वेतन शीर्ष पर प्रशासनिक और प्रबंधन लागत के लिए स्वीकार्य केंद्रीय योगदान तक ही सीमित होगा।
  • पीएमयू का ढांचा और आवेदन प्रपत्र दिशा निर्देश के संलग्नक I(क) और संलग्नक I(ख) में दिया गया है।
  • पीएमयू की जनशक्ति लागत के अतिरिक्त, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र कार्यालय व्यय, यात्रा व्यय, आकस्मिकता जैसी प्रशासनिक लागत और उपकरणों एचएमआईएस के कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर तथा प्रत्येक घटक के अंतर्गत संबंधित कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण सहित अवसंरचना की वार्षिक अनुरक्षण लागत, लेखा परीक्षा, निगरानी एवं मूल्यांकन, परियोजना तैयार करने के लिए परामर्शदात्री सेवाएं और आयुष अस्पतालों एवं औषधालयों के लिए अतिरिक्त जनशक्ति हेतु वित्तीय सहायता ले सकते हैं। मिशन के अंतर्गत राज्य के लिए उपलब्ध निवल निधियों का कुल 4% राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासनिक लागत के लिए निर्धारित है।

संसाधन आवंटन रूपरेखा

  • आयुष सेवाओं, शैक्षणिक संस्थाओं और एएसयू एवं एच औषधों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण- विशेष श्रेणी राज्यों (पूर्वोत्तर राज्यों और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर के तीन पहाड़ी राज्यों) के लिए सहायता अनुदान घटक भारत सरकार से 90 प्रतिशत होगा और शेष 10 प्रतिशत स्कीम के अंतर्गत सभी घटकों के प्रति राज्य योगदान से किए जाने का प्रस्ताव है। अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए सहभाजन स्वरूप 75%-25% होगा।
  • औषधीय पादप के लिए- इस घटक के अंतर्गत पूर्वोत्तर राज्यों और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर के पहाड़ी राज्यों में केन्द्र सरकार दवारा 100% वित्त पोषित किया जाएगा जबकि अन्य राज्यों में केन्द्र और राज्यों के बीच 90-10 के अनुपात में इसे साझा किया जाएगा।
  • मिशन के अंतर्गत भारत सरकार से राज्यों को संसाधन पूल निम्नलिखित के आधार पर निर्धारित किया जाएगा-
    • ईएजी राज्यों, दवीपीय संघ राज्य क्षेत्रों और पहाड़ी राज्यों के लिए गुणा कारक के रूप में 2 के साथ 70% अधिभार सहित जनसंख्या
    • प्रति व्यक्ति आय के परोक्षी सूचक के आधार पर निर्धारित किया गया पिछड़ापन जिसका 15% अधिभार होगा।
    • पिछले वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की स्थिति के अनुसार लंबित और देय उपयोगिता प्रमाण पत्रों के व्यतुक्रमानुपात प्रतिशत पर निर्धारित निष्पादन जिसका 15% अधिभार होगा।
  • राष्ट्रीय आयुष मिशन के घटकों में कुछ मुख्य कार्यकलाप होंगे जो आवश्यक हैं और अन्य कार्यकलाप वैकल्पिक होंगे। मुख्य/आवश्यक मदों के लिए राज्य को आवंटित संसाधन पूल का 80% प्रयोग किया जा सकता है। वैकल्पिक मदों के लिए राज्यों को आवंटित संसाधन पूल का शेष 20% नम्य रूप से इस प्रतिबंध से प्रयोग किया जा सकता है कि संसाधन पूल का यह 20% किसी भी मद पर खर्च किया जा सकता है बशर्ते किसी भी घटक पर निधियों का 5% से अधिक खर्च न किया गया हो।

केंद्र योगदान के प्रति निर्मुक्त राशि निम्नानुसार होगी–

पात्र केंद्र योगदान – (पिछले वर्षों में निर्मुक्त सहायतानुदान की खर्च न की गई शेष राशि + शुद्ध  ब्याज)

उपयोगिता प्रमाण पत्र

अनावर्ती अनुदानों के संबंध में आगामी सहायतानुदान की संस्वीकृति के उद्देश्य से वह प्रयोजन जिसके लिए अनुदान संस्वीकृत किया गया था, के लिए प्राप्त अनुदानों के वास्तविक उपयोगिता का प्रपत्र जीएफआर 19- ए में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए। आवर्ती अनुदान के संबंध में, आगामी वर्षों में सहायतानुदान की निर्मुक्ति पिछले वित्तीय वर्ष के अनुदानों के संबंध में अनंतिम आधार पर उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद ही की जाएगी। आगामी वित्तीय वर्ष की संस्वीकृत कुल राशि की 75% से अधिक सहायतानुदान की निर्मुक्ति पिछले वर्ष में निर्मुक्त सहायतानुदान से संबंधित उपयोगिता प्रमाणपत्र और वार्षिक लेखा परीक्षित विवरण प्रस्तुत करने के बाद ही की जाएगी।

निधियों का प्रवाह

वित्तीय वर्ष 2014-15 से सहायतानुदान राजकोष के माध्यम से राज्य सरकारों को हस्तांतरित किया जाएगा और राज्य सरकारों से राज्य योगदान सहित राज्य आयुष सोसाइटी को निधियां हस्तांतरित की जाएंगी। तथापि, वतर्मान वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान सहायतानुदान मौजूदा स्वरूप के अनुसार हस्तांतरित किया जाएगा।

राज्यों द्वारा राज्य वार्षिक कार्य योजना तैयार करना

क. 2014-15 से निम्नलिखित उपाय किए जाएंगे-

1. आयुष विभाग, भारत सरकार दवारा अस्थायी राज्य आवंटन का उल्लेख – 31 दिसम्बर।

2. सुमेलित राज्य योगदान सहित राज्य सरकार दवारा बजटीय प्रावधान – 31 मार्च

3. राज्य आयुष सोसाइटी की कार्यकारी समिति दवारा राज्य वार्षिक कार्य योजना तैयार करना – 30 अप्रैल

4. आयुष विभाग, भारत सरकार में राज्य वार्षिक कार्ययोजना की प्राप्ति – मई का पहला सप्ताह।

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विस्तृत दिशानिर्देश के संलग्नक-II में दिए गए प्रारूप के अनुसार राज्य वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत करेंगे।

निगरानी और मूल्यांकन

  • केंद्र/राज्य स्तर पर एक समर्पित एमआईएस निगरानी एवं मूल्यांकन प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा। अत- राष्ट्रीय स्तर पर तीन एचएमआईएस प्रबंधकों और राज्य स्तर पर एक एचआईएमएस प्रबंधक सहित स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • कार्यान्वयन प्रगति और बाधाएं तथा सुधार की गुंजाइश जानने के लिए आयुष मिशन का एक समवर्ती मूल्यांकन किया जाएगा। मिशन के क्रियान्वयन के 2 वर्ष के बाद तृतीय पक्ष मूल्यांकन भी किया जाएगा।

अपेक्षित परिणाम

क. उन्नयनीकृत शैक्षणिक संस्थानों की संख्या में वृद्धि के जरिए आयुष शिक्षा में सुधार।

ख. आयुष अस्पतालों और औषधालयों की संख्या, औषधों और जनशक्ति की उपलब्धता में वृद्धि और निवारक एवं संवर्धनात्मक पहलुओं पर विशेष ध्यान देते हुए आयुष सेवाओं तक बेहतर पहुंच।

ग. आयुष चिकित्सा पद्धतियों के लिए गुणवत्तायुक्त कच्ची सामग्री की सतत उपलब्धता

घ. भेषजियों, औषध प्रयोगशालाओं की संख्या में वृद्धि और एएसयू एवं एच औषधों के बेहतर प्रवर्तन तंत्र के जरिए गुणवत्तायुक्त एएसयू एवं एच औषधों की बेहतर उपलब्धता।

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