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भारत के राष्ट्रपति | भारत के राष्ट्रपति के बारे में पूरी जानकारी 2021

संवैधानिक पदक्रम में राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च होता है इसी कारण राष्ट्र का प्रथम नागरिक ‘ राष्ट्रपति ‘ होता है । भारत में राष्ट्रपति एकता व अखण्डता का प्रतीक , तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति , देश का मुखिया तथा कार्यपालिका काऔपचारिक प्रधान / नाममात्र की कार्यपालिका का मुखिया संवैधानिक प्रधान तथा संविधान का सुप्रीम कमाण्डर होता है । भारत के राष्ट्रपति की तुलना ‘ ब्रिटेन के राजा ‘ से की जाती है । राष्ट्रपति किसी भी सदन ( राज्यसभा / लोकसभा ) का सदस्य नहीं होता , अपितु संसद का एक भाग ( अंग ) होता है ।

राष्ट्रपति का निर्वाचन

अनु . 54 के तहत् भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से न होकर अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है । राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप में आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा तथा ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा । ( i ) राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेने वाले निर्वाचित सदस्य

• लोकसभा के

  • राज्यसभा के
  • विधानसभाओं के

राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के मनोनीत सदस्य तथा राज्यों की विधान परिषदों के सदस्य भाग नहीं लेते हैं । विधान परिषद के सभी सदस्य ( उत्तरप्रदेश , बिहार , महाराष्ट्र , आंध्र प्रदेश , तेलंगाना , कर्नाटक )

राष्ट्रपति की पदावधि

अनु .56 के तहत् राष्ट्रपति पद की अवधि 5 वर्ष की होती है लेकिन यह पदावधि तीन प्रकार से ( मृत्यु , उपराष्ट्रपति को त्यागपत्र व महाभियोग द्वारा ) समाप्त हो सकती है । अनु . 57 के तहत् राष्ट्रपति के पुनर्निवाचन के लिए पात्रता ( संविधान इस संदर्भ में मौन है ) ।

राष्ट्रपति के निर्वाचन की योग्यताएँ

अनु .58 के तहत् राष्ट्रपति के निर्वाचन हेतु कुछ योग्यताओं का वर्णन किया गया है , जो निम्न

( i ) भारतीय नागरिक ( भारतीय मूल का ) हो ।

( ii ) न्यूनतम 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो ।

( iii ) वह लाभ के पद पर न हो ।

( iv ) लोकसभा के सदस्य बनने की योग्यता या किसी भी निर्वाचन मतदाता सूची में उसका नाम हो ।

( v ) मानसिक रूप से पागल व आर्थिक दृष्टि से दिवालिया ना हो ।

राष्ट्रपति के पद के लिए शर्ते

अनु .59 के तहत राष्ट्रपति के उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कम से कम 50 प्रस्तावक , 50 अनुमोदक ( जबकि उपराष्ट्रपति के लिए यह संख्या 20-20 हैं । ) व 15 हजार रुपये जमानत राशि RBI में जमा की जाती है । राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार अपना नामांकन लोकसभा के महासचिव को जमा कराता है । राष्ट्रपति की प्रचार प्रक्रिया 14 दिन चलती है ।

राष्ट्रपति द्वारा शपथ

अनु .60 के तहत् राष्ट्रपति अन्य पदों की शपथ के प्रारूप से भिन्न संविधान के संरक्षण की शपथ लेता है जो सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है तथा मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है ।

राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया

अनु . 61 के तहत् राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया महाभियोग कहलाती है । राष्ट्रपति को संसद द्वारा महाभियोग के आधार पर हटाया जा सकता है परन्तु अनु . 56 ( ख ) : के अनुसार , संविधान का अतिक्रमण करे तो ही । महाभियोग एक अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया है जो तीन चरणों से होकर गुजरती है ।

( i ) प्रथम चरण – संकल्प

( ii ) द्वितीय चरण – संकल्प पारित

( ii ) तृतीय चरण – महाभियोग

इसे लाने के लिए एक चौथाई ( 1/4 ) सदस्यों द्वारा 14 दिन पहले लिखित रूप में राष्ट्रपति को सूचित करना आवश्यक होता है । महाभियोग प्रस्ताव किसी भी सदन में लाया जा सकता है । 14 दिन बाद जिस सदन के द्वारा प्रस्ताव लाया गया है उसी सदन में कुल सदस्यों का दो तिहाई ( 2/3 ) सदस्यों द्वारा पारित होने पर दूसरे सदन में भी यह ही प्रक्रिया होगी और वहाँ भी कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से पारित हो जाये तो ‘ राष्ट्रपति ‘ को पद से हटा हुआ माना जायेगा अर्थात् भारत के राष्ट्रपति को भारत की संसद भी उसके पद से हटा सकती है । राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए केवल संविधान के प्रति उल्लंघन या अतिक्रमण ही मान्य है व्यक्तिगत आचरण नहीं ।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ

राष्ट्रपति की शक्तियों को हम मुख्यतः दो भागों में विभाजित करते हैं

( 1 ) शान्तिकालीन सामान्यकालीन शक्तियाँ

1. कार्यपालिका शक्तियाँ

अनु . 53 : कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान राष्ट्रपति होता है ।

2. नियुक्ति संबंधी शक्तिया-

राष्ट्रपति कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ करता है जैसे – प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करना तथा उसकी सलाह पर अपनी सहायता के लिए अनु . 74 के तहत् मंत्रिपरिषद् का गठन , राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों के राज्यपाल ( अनु . 155 ) व प्रशासक व आयुक्तों की नियुक्तियाँ , संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों ( अनु . 316 ) की , चुनाव आयुक्तों ( अनु . 324 ) की , महान्यायवादी ( अनु . 376 ) की , अनुसूचित जाति / जनजाति / अन्य पिछड़ी जनजातियों के आयोग का गठन , नियंत्रक व महालेखा परीक्षक की नियुक्ति । केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली , पाण्डिचेरी , अण्डमान , जम्मू और लद्दाख में उपराज्यपाल की तथा दमनदीव , दादर नगर हवेली व लक्षद्वीप में प्रशासक की तथा चण्डीगढ़ में आयुक्त की नियुक्ति ।

3. विधायी शक्तियाँ

राष्ट्रपति अनु . 85 के तहत् संसद का अधिवेशन ( सत्र आहुत ) बुलाता है तथा उसका सत्रावसन ( सत्र समाप्त ) करता है तथा प्रधानमंत्री की सलाह पर लोकसभा को समय से पहले भंग करता है , तो नई लोकसभा के चुनाव की अधिसूचना भी जारी करता है ।

अनु . 87. – राष्ट्रपति नई लोकसभा के गठन के समय तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में संसद के दोनों सदनों समक्ष मंत्रिमण्डल के द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पढ़ता है या प्रस्तुत करता है , जिसे संसद धन्यवाद प्रस्ताव के रूप में पारित करती है ।

अनु . 108 – धन विधयेक एवं संशोधन विधेयक को छोड़कर शेष अधिवेशन को संसद का एक सदन पारित कर दे और दूसरा सदन छः माह तक पारित नहीं करे , तो राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाता है लेकिन इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करेगा ।

राष्ट्रपति अनु . 80 ( 2 ) के तहत् राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है , तो राष्ट्रपति अनु . 331 के तहत् लोकसभा में 2 एंग्लो इंडियन व्यक्तियों को मनोनीत करता है । राष्ट्रपति चुनाव निर्वाचन आयोग के परामर्श पर संसद सदस्य की अयोग्यता का निर्धारण करता है ।

राष्ट्रपति नियंत्रण महालेखा परीक्षक , संघ लोकसेवा आयोग तथा वित्त आयोग की रिपोर्टों को संसद के समक्ष रखवाता है । राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक अधिनियम का रूप नहीं ले सकता जबकि कुछ विधेयक ऐसे भी हैं जिन्हें पेश करने से पूर्व राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक होती है ।

राष्ट्रपति धन विधेयकों के अलावा किसी भी विधेयक को संसद के पास एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है ।

अध्यादेश राष्ट्रपति अनु . 123 के तहत् यदि संसद का अधिवेशन नहीं चल रहा हो और विधेयक जरूरी हो तो राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री व मंत्रिपरिषद् की लिखित सलाह पर एक अध्यादेश जारी कर सकता है , जो ‘ अस्थाई कानून ‘ कहलाता है । यह अध्यादेश छः माह तक मान्य रहता है क्योंकि संसद के अधिवेशनों में छः माह का अंतर होता है । संसद के अधिवेशन प्रारम्भ होने के छः सप्ताह ( 42 दिन ) के भीतर संसद द्वारा इस अध्यादेश को अनुमोदित करना आवश्यक होता है , अन्यथा यह समाप्त हो जाता है ।

वीटो शक्ति ( निषेध )

संसद द्वारा पारित विधेयक को अधिनियम बनाने से पूर्व राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और उस स्थिति में राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं , या तो वह विधेयक को अनुमति देता है , या नहीं देता है या पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है । इस प्रकार राष्ट्रपति को तीन प्रकार की वीटो शक्ति प्राप्त हैं

( i ) अंत्यातिक वीटो – यदि गैर सरकारी सदस्य राष्ट्रपति के समक्ष कोई विधेयक रखे तो वह इसे पारित करने के लिए बाध्य नहीं है ।

( ii ) निलंबनकारी वीटो – अनु . 74 के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह को मानने के लिए बाध्य है , परन्तु एक बार पुनः विचार के लिए लौटा सकता है ।

( ii ) जे.बी. वीटो / पॉकेट वीटो पॉवर – न स्वीकृति और न अस्वीकृति ।

वित्तीय शक्तियाँ

राष्ट्रपति अनु . 280 में वित्त आयोग का गठन करता है तथा उसका आकस्मिक निधि पर नियंत्रण [ संचित निधिः ( अनु . 266 ) से सरकार के सभी कार्य होते हैं व आकस्मिक निधि ( अनु . 267 ) से किसी विशेष अचानक आई गिरावट की पूर्ति करते हैं ] होता है । कोई भी विधेयक या राज्यों के पुनर्गठन से सम्बन्धित विधेयक या संशोधन प्रक्रिया से सम्बन्धित विधेयक इसकी अनुमति के बाद ही संसद में प्रस्तुत किये जाते हैं ।

न्यायिक शक्तियाँ

अनु . 124 के तहत् सर्वोच्च न्यायालय में व अनु . 217 के तहत् उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों सहित न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है ।

अनु .143  – संवैधानिक प्रश्न पर , सार्वजनिक विषयों पर राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह या विचार विमर्श कर सकता है , लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश सलाह दे या न दे तथा भारत का राष्ट्रपति उसकी सलाह माने या ना माने उसकी इच्छा के ऊपर है ।

अनु . 72 के तहत् राष्ट्रपति किसी व्यक्ति की सजा को कम या परिवर्तित तथा पूर्ण रूप से माफ ( क्षमा ) भी कर सकता है ।

कूटनीतिक शक्तियाँ – दूसरे राष्ट्रों में भारत का नेतृत्व करता है । समझौते एवं संधियों पर हस्ताक्षर ( मंत्रिपरिषद् की सलाह से ) करता है । दूसरे राष्ट्रों में भारत के राजदूत व उच्चायुक्तों की नियुक्ति करता है ।

उच्चायुक्त – अंग्रेजों के उपनिवेशिक देश ( राष्ट्रमण्डल ) आपस में किसी राजदूत की नियुक्ति करे वह ‘ उच्चायुक्त ‘ कहलाता है तथा अन्य देशों में राजदूत नियुक्ति किये जाते हैं ।

सेनाध्यक्ष – राष्ट्रपति तीनों सेनाओं ( थल सेना , वायु सेना , जल सेना ) के अध्यक्षों की नियुक्ति करता है और स्वयं कमाण्डर होता है तथा युद्ध व शान्ति की घोषणा करता है ।

( 2 ) आपातकालीन शक्तियाँ

राष्ट्रपति को तीन प्रकार की आपातकालीन शक्तियाँ प्राप्त होती है जिसका उल्लेख संविधान के भाग -18 में अनु . 352 से 360 में है ।

अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल

युद्ध बाह्य आक्रमण एवं आंतरिक अशांति के कारण भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा खतरे में हो तो राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है

अनुच्छेद 356 राज्य में राष्ट्रपति शासन

अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाने पर तथा राज्य सरकार संविधान के उपबंध के अनुरूप कार्य न करें तो राज्यपाल के प्रतिवेदन के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर राष्ट्रपति राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करवा सकता है

अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकारण

अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति को आभास हो जाए की राष्ट्र की वित्तीय शाखा को खतरा है तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मंत्री परिषद की लिखित सलाह पर वित्तीय आपात की घोषणा करता है जो 2 माह के भीतर संसद के दोनों सदनों के साधारण बहुमत से पारित होना अनिवार्य है

राष्ट्रपति का निवास

स्थान दिल्ली में रायसीना पहाड़ी पर स्थित राष्ट्रपति भवन , जिसका नक्शा 1911 में ‘ एडवर्ड लुटियन्स ‘ ने बनाया था । जिसे पहले ‘ वायसरीगंल लॉज ‘ कहा जाता था , जिसमें रहने वाले प्रथम व्यक्ति . ‘ लॉर्ड इरविन ‘ थे ।

भारत के राष्ट्रपतियों की सूची

1. डॉ.राजेन्द्र प्रसाद [ 1952-1957 व 1957-19621

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे , जिन्होंने राष्ट्रपति बनने से पूर्व संविधान सभा के सभापति पद पर कार्य किया । इनका सबसे लम्बा कार्यकाल दो कार्यकालों का निर्वाह था । एकमात्र निर्वाचित व मनोनीत राष्ट्रपति व तीन बार शपथ लेने वाले राष्ट्रपति थे ।

2. डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1962-1967

भारत के प्रथम और राजनैतिक व दार्शनिक राष्ट्रपति थे । प्रथम उपराष्ट्रपति , जो राष्ट्रपति अने , जिन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले भारत रल -1954 ‘ प्राप्त किया । इनके कार्यकाल में भारत चीन युद्ध ( 20 अक्टूबर , 1962 ) हुआ । भारत के एकमात्र दार्शनिक राष्ट्रपति कहलाने वाले डॉ . राधाकृष्णन के जन्म दिवस ( 5 सितम्बर ) को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

3. डॉ . जाकिर हुसैन 1967-1969 

प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति , अल्पसंख्यक राष्ट्रपति थे , जिनकी पद पर रहते हुए 1969 में मृत्यु ( प्रथम राष्ट्रपति ) हुई , जिन्होंने राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति एवं राज्यपाल तीनों पदों पर कार्य किया और इनका कार्यकाल अब तक के सभी राष्ट्रपतियों मॅसबसे कम ( 1967-1969 ) था । ये दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक भी थे ।

4. वी.वी. गिरि

( वराह गिरी वेंकट गिरि ) 3 मई , 1969 से 20 जुलाई 1969 – एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे , जिन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति एवं निर्वाचित राष्ट्रपति तीनों पदों पर कार्य किया । जिन्होंने का चुनाव लड़ने के लिए त्यागपत्र दिया । ये प्रथम कार्यवाहक राष्ट्रपति थे ।

* वी.वी. गिरि ( 1969-1974 )

वी.वी . गिरि ( प्रथम कार्यवाहक राष्ट्रपति ) एकमात्र राष्ट्रपति हैं जो उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देकर राष्ट्रपति बने तथा जिनके निर्वाचन के लिए द्वितीय चक्र की मतगणना करनी पड़ी तथा जिन्हें 50.22 % मत मिलने पर भी राष्ट्रपति घोषित किया गया ।

* मोहम्मद हिदायतुल्लाह ( कार्यवाहक )

20 जुलाई , से 24 अगस्त , 1969 – मोहम्मद हिदायतुल्लाह सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश , जिन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति एवं निर्विरोध उपराष्ट्रपति के पद पर कार्य किया , जिनका कार्यकाल कार्यवाहक राष्ट्रपतियों में सबसे कम [ 1 माह 4 दिन ] था ।

5. फखरूद्दीन अली अहमद ( 1974-1977 )

जून 1975 में आन्तरिक अशान्ति के नाम पर आपातकाल लगाने वाले प्रथम राष्ट्रपति थे , जिनकी कार्यकाल के दौरान मृत्यु ( द्वितीय राष्ट्रपति ) हुई । ध्यान रहे – इनके द्वारा सर्वाधिक अध्यादेश ( कुल 35 अध्यादेश ) जारी करने का रिकॉर्ड है ।

* बी.डी. जत्ती ( कार्यवाहक ) ( 1977 )

ये तीसरे कार्यवाहक राष्ट्रपति थे , जो सबसे लम्बी अवधि तक कार्यवाहक ( लगभग 5 महीने ) राष्ट्रपति रहे ।

6. नीलम संजीव रेड्डी ( 1977-1982 )

डॉ . नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र राष्ट्रपति हैं जो निर्विरोथ राष्ट्रपति चुने गये , जो सबसे कम आयु ( 64 वर्ष ) के राष्ट्रपति थे , जिन्होंने राष्ट्रपति बनने से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया । 44 वां संविधान संशोधन ( 1978 ) इन्हीं के समय हुआ था ।

7. ज्ञानी जैलसिंह ( 1982-1987 ) –

भारत के प्रथम सिक्ख राष्ट्रपति , जो सबसे कम पढ़े लिखे राष्ट्रपति थे । इनके द्वारा 1986 में पहली बार डाकघर विधेयक पर वीटो [ मैं मना करता हूँ ।। का प्रयोग किया गया । ये राष्ट्रपति बनने से पूर्व पंजाब के मुख्यमन्त्री रह चुके थे । 52 वां संविधान संशोधन ( 1985 ) इन्हीं के समय हुआ था । जिसके अन्तर्गत दसवीं अनुसूची ( दल – बदल पर रोक ) जोड़ी गई ।

8. रामास्वामी वेंकटरमण ( 1987-1992 )

ये सबसे अधिक आयु ( 77 वर्ष ) के राष्ट्रपति थे , जिन्होंने चार प्रधानमंत्रियों ( राजीव गाँधी , बी.पी. सिंह , चन्द्रशेखर , पी.वी. नरसिम्हाराव ) के साथ काम किया । 61 वां संविधान संशोधन ( 1988 ) इन्हीं के समय लागू हुआ , जिसके अन्तर्गत मताधिकार की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई ।

9. डॉ.शंकरदयाल शर्मा ( 1992-1997 )

इन्होंने अपने कार्यकाल में सर्वाधिक ( 4 ) प्रधानमंत्रियों ( पी.वी. नरसिम्हाराव , देवगौड़ा , अटल बिहारी वाजपेयी , इन्द्रकुमार गुजराल ) के साथ मिलकर कार्य किया । ये राष्ट्रपति बनने से पूर्व तीन राज्यों के राज्यपाल भी रह चुके थे । 73 वां संविधान संशोधन ( 1992 ) इन्हीं के समय हुआ ।

10. के.आर. नारायणन ( 1997-2002 )

भारत के प्रथमदलित राष्ट्रपति , इन्होंने राष्ट्रपति बनने से पूर्व कई देशों में उच्चायुक्त एवं राजदूत के रूप में कार्य किया । ये 20 वीं एवं 21 वीं शताब्दी में रहने वाले राष्ट्रपति थे ।

11. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ( 2002-2007 )

भारत के प्रथम स्वप्न दृष्टा व मानवतावादी विचार रखने वाले राष्ट्रपति , जो दूसरे गैर – राजनैतिक राष्ट्रपति थे । ये प्रथम वैज्ञानिक राष्ट्रपति थे , जिन्हें मिसाइल मैन ( मिसाइल का जनक ) के नाम से भी जाना जाता है । 15 अक्टूबर को यूएनओ ने कलाम जी के जन्मदिन को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की ।

12. श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल 2007 से 2012 –

भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति ( एशिया की प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीलंका की चन्द्रिका कुमार तुंगे ) थी , जो राज्यपाल के रूप में कार्य करती हुए राष्ट्रपति बनी । इससे पूर्व ये राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल थी ।

13. प्रणव मुखर्जी ( 2012-2017 ) –

प्रणव मुखर्जी ( बचपन का नाम ‘ पोल्टू ‘ ) व्यक्तिगत रूप से 13 वें राष्ट्रपति जबकि कार्यकाल की दृष्टि 14 वें राष्ट्रपति हैं । ध्यान रहे – राजेन्द्र प्रसाद 2 बार राष्ट्रपति रहे हैं । इनका जन्म प . बंगाल के बीरभूमि जिले के किरनाहर शहर के एक छोटे से गाँव मिराटी / मिराती में ब्राह्मण परिवार में 11 दिसम्बर , 1935 में हुआ । इससे पूर्व ये केन्द्र सरकार में वित्त मंत्री थे । 2019 में भारत रत्न से सम्मानित हुये ।

14. रामनाथ कोविंद ( 25 जुलाई , 2017 से अब तक )

रामनाथ कोविंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के डेरापुर तहसील के परौंख गाँव में 1 अक्टूबर , 1945 में दलित परिवार में हुआ ।

भाजपा समर्थक रामनाथ कोविंद 20 जुलाई , 2017 को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर देश के 14 वें राष्ट्रपति बने । जो कार्यकाल की दृष्टि से देश के 15 वें राष्ट्रपति है । रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनने से पहले 2015-17 तक बिहार के राज्यपाल रहे।ये उत्तर प्रदेश से पहले और देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति है । जो 2 बार ( 1994 से 2006 तक ) उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में सदस्य चुनकर गये ।

रामनाथ कोविंद न्यूनतम वोटों से जीतने वाले भारत के तीसरे राष्ट्रपति है ।

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