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बहुभ्रूणता किसे कहते हैं, बहुभ्रूणता की परिभाषा क्या है खोज किसने की (polyembryony in hindi)

बहुभ्रूणता किसे कहते हैं, बहुभ्रूणता की खोज किसने की, बहुभ्रूणता का महत्व

सामान्यतया एक बीज में केवल एक ही भ्रूण पाया जाता हैं, परन्तु कभी-कभी कुछ बीजों में एक से अधिक भ्रूण पाये जाते हैं। एक ही बीज में एक से अधिक भ्रूण के विकसित होने की प्रक्रिया को बहुभ्रूणता (Polyembryony) कहते हैं।

हमारे आसपास के परिवेश में अनेक पौधे पाये जाते हैं, जिनके बीजों में एक से अधिक भ्रूण बनते हैं अनावृतबीजी पौधों (Gymnosperms) में से बहुभ्रूणता एक सामान्य प्रक्रिया हैं परन्तु आवृतबीजी पौधों में केवल संतरा, नींबू, तम्बाकू, ऐलियम (Allium) एवं क्रोटेलेरिया (Crotalaria) इत्यादि में बहुभ्रूणता पाई जाती है।

बीजाधारी पादपों में बहुभ्रूणता की प्रक्रिया का पर्यवेक्षण सर्वप्रथम ल्यूवेनहॉक (1719) द्वारा संतरे के बीजों में किया गया।

 

बहुभ्रूणता का वर्गीकरण

ब्रानें (Braun) 1859 एवं अन्य भ्रूण वैज्ञानिकों ने बहुभ्रूणता को चार भागों में विभक्त किया जो निम्नलिखित प्रकार हैं

(1) विदलन बहुभ्रूणता

आवृतबीजी पौधों के बीजों में यह एक से अधिक भ्रूणों के विकसित होने की सरलतम एवं सर्वाधिक सामान्य प्रक्रिया है। इसके अन्तर्गत युग्मनज (Zygote) या निषिक्तांड (Zoospore), अथवा प्राभ्रूण (Proembryo) का विखण्डन या विदलन (Splittong (orcleavage), दो या दो से अधिक टुकड़ों अथवा इकाइयों में हो जाता है तथा प्रत्येक खण्ड विकसित होकर स्वतन्त्र भ्रूण का निर्माण करता है।

(2) भ्रूणकोष में अण्ड कोशिका के अतिरिक्त किसी अन्य कोशिका से भ्रूण की उत्पत्ति

इसमें भ्रूणकोष की अनिषेचित अथवा निषेचित सहायक कोशिकाओं द्वारा अतिक्ति भ्रूण का निर्माण होता है। जैसे-अनिषेचित ‘सहायक कोशिकाओं द्वारा बनने वाले भ्रूण अगुणित होते हैं।

( 3 ) भ्रूणकोष के बाहर स्थित बीजाण्ड की किसी भी द्विगुणित कोशिका से भ्रूण का विकास

इसमें बीजाण्ड में भ्रूणकोष के बाहर उपस्थित बीजाणुद्भिद ऊतक जैसे- बीजाण्डकाय (Nucellus ) एवं अध्यावरण ( Integuments) आदि की कोशिकाएं सक्रिय होकर भ्रूण का निर्माण करती है। ऐसे भ्रूण अपस्थानिक भ्रूण (Adventive embryo) कहलाते हैं। उदाहरण-सिट्स, जामुन एवं आम

(4) बीजाण्ड में एक से अधिक भ्रूणकोषों का विकास

कुछ आवृतबीजी पादपों के बीजाण्ड में एक से अधिक भ्रूणकोषों का निर्माण हो जाता हैं। प्रत्येक भ्रूणकोष में उपस्थित अण्ड कोशिका निषेचन के पश्चात् भ्रूण का निर्माण करती है जिससे एक बीजाण्ड में अनेक भ्रूण बन जाते है। उदाहरण- केजूराइना मोन्टाना, सोलेनम मेलोन्जिना, जुसिया रेपेन्स आदि में।

बहुभ्रूणता का महत्व

आधुनिक उद्यानविज्ञान (Horticulture) एवं पादप प्रजनन (Plant breeding) में केवल एक सामान्य युग्मजी (Zygotic) भ्रूण होता है एवं अन्य अपस्थानिक भ्रूण प्राप्त पौधों का ही विशेष उपयोग होता हैं, इसके द्वारा समान लक्षणों वाले पौधे उत्पन्न किये जा सकते है। बहुभ्रूणता के अन्य अनुप्रायोगिक उपयोग निम्र प्रकार से है

  1. बीजाण्डकायी भ्रूण (Nucellar embryo) से विकसित पौधे के सभी लक्षण मादा जनक (Female parent) के समान होते हैं, अतः इन इच्छित लक्षणों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
  2. बीजाण्डकायी नवांकुर (Nucellar seedling) में मूसला जड़ होती हैं, अत: इसका मूलतंत्र (Root system) कलम से प्राप्त पौधे की तुलना में अधिक विकसित होता है।
  3. बहुभ्रूणता से प्राप्त पौधे अधिक ओज (Vigour) से भरपूर होते हैं।
  4. बीजाण्डकायी भ्रूण रोग रहित एवं स्वस्थ होते हैं, अतः इनके रोगमुक्त क्लोनों को अपस्थानिक भ्रूणता द्वारा तैयार कर सकते हैं।

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