Educationट्रांसपोसोन्स की खोज Transposons | ट्रांसपोजिशन की क्रियाविधि | ट्रांसपोजोन्स का महत्त्व

ट्रांसपोसोन्स की खोज Transposons | ट्रांसपोजिशन की क्रियाविधि | ट्रांसपोजोन्स का महत्त्व

ट्रांसपोसोन्स की खोज Discovery of Transposons, Mechanism of Transposition, Significance of Transposons

Discovery of Transposons इन खण्डों की खोज बारबारा मैक्लिन्टॉक ने मक्के में की व इन्हें नियंत्रक खण्ड (controlling elements) नाम दिया। उन्होंने पाया कि जब मक्का के गुणसूत्रों पर नियंत्रक खण्ड उपस्थित होते हैं। तब विशिष्ट स्थलों पर खण्डन हो जाता है व गुणसूत्रों के पुर्नयोजन से गुणसूत्र संरचना में परिवर्तन हो जाता है। बारबारा ने पाया कि 9वें गुणसूत्र पर उपस्थित Ds अपने स्थल का खण्डन करता है। साथ ही यह केवल तभी सक्रिय होता है जब किसी अन्य गुणसूत्र पर Ac खण्ड उपस्थित हो। बारबारा ने यह भी पाया कि 9वें गुणसूत्र में स्थित जीन I भ्रूणपोष के रंग का निरोधन करता है। इस प्रकार iio↓ को

IIO↑ से संकरण करवाने पर प्राप्त संकर (Ii) रंगहीन होगा परंतु जब जीन स्थल पर Ds खण्ड उपस्थित होता है तब यह उस स्थल का खण्डन कर देता है जिससे I जीन विलुप्त हो जाते हैं व iio↓ व II

O↑ का संकरण करवाने पर चित्तकबरे बीज (variegated seeds) प्राप्त होते हैं। यदि Ac की मात्रा को बढ़ा दिया जाए तो 1 जीन का विलुप्तिकरण धीरे होगा व रंगीन धब्बे कम हो जाते हैं।

ट्रांसपोजिशन की क्रियाविधि (Mechanism of Transpositions)

ट्रांसपोजिशन की क्रियाविधि निम्न चरणों में पूर्ण होती है।

1. दाता कार अवस्था (Donar Cut Stage) –

एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइम के द्वारा ट्रांसपोजन (काली रेखाओं द्वारा दर्शित) के दोनों सिरे दाता या पोषक DNA तथा ग्राही DNA के लक्ष्य स्थल (target site ) के दोनों सिरे टूट जाते हैं। स्थानान्तरण की व्याख्या करने का तरीका

2. रैंड स्ट्रैंड एक्सचेंज स्टेज और मरम्मत

यह प्रावस्था दुांसपोजेज एन्जाइम द्वारा सम्पन्न होती है जिससे ट्रांसपोजोन का सिरा पार्टी DNA (recepient DNA) के लक्ष्य स्थल से जुड़ जाता है। बचे हुए खालो स्थान सिगेजेज एन्जाइम द्वारा भर दिये जाते हैं।

3. लक्ष्य स्थल द्विगुणन एवं पुनर्योजन (Target Site Duplication and Recombination)

ट्रांसपोजोन व लक्ष्यक्रम द्विगुणित (duplicate) होते हैं, तत्पश्चात् पारस्परिक पुनयोजन होता है।

ट्रांसपोजोन्स का महत्त्व ( Importance of Transposons )

ट्रांसपोजोन्स के अध्ययन की निम्न उपयोगिता है :

1. प्रतिजैविक प्रतिरोधिता ( Antibiotic resistance )

स्थानान्तरण प्रक्रिया जीवाणुओं में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । इसके द्वारा बैक्टीरिया में एक या अधिक प्रतिजैविकों की प्रतिरोधिता का तेजी से प्रसार होता है । परन्तु यह प्रसार मानव व जन्तुओं के लिए हानिकारक है ।

2. टांसपोजोन्स उत्परिवर्तन रूप में ( Transposons as mutagens )

ट्रांसपोजोन्स को उत्प्रेरित उत्परिवर्तन में प्रयुक्त किया जा सकता है । ये उत्परिवर्तन जीन की संरचना तथा नियंत्रक अध्ययन में उपयोगी होते हैं ।

3. आनुवंशिक अभियान्त्रिकी व जैव प्रौद्योगिकी में ट्रांसपोजोन्स का उपयोग ( Use of transposons in genetic engineering and biotechnology ) –

अवैध पुनर्योजन की घटना , कोशिकीय जीन अभिव्यक्ति में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है । जिसके द्वारा जीन के संगठन व अभिव्यक्ति को समझा जा सकता है । ट्रांसपोजोन्स उच्च जीवों व गुणसूत्र पुनव्यर्वस्था का एक कार्यशील मॉडल प्रस्तुत करता है । इसके अलावा ट्रांसपोजोन्स द्वारा जीनों को कृत्रिम रूप से स्थानान्तरित किया जा सकता है ।

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