Uncategorizedचार चने कविता - निरकार देव सेवक

चार चने कविता – निरकार देव सेवक

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चार चने कविता – निरकार देव सेवक

पैसा पास होता तो चार चने लाते।

चार में से एक चना तोते को खिलाते।

तोते को खिलाते तो टॉय-टॉय गाता।

टॉय-टॉय गाता तो बड़ा मजा आता।

पैसा पास होता तो चार चने लाते।

चार में से एक चना घोड़े को खिलाते ।

घोड़े को खिलाते तो पीठ पर बैठाता ।

पीठ पर बैठाता तो बड़ा मज़ा आता।

पैसा पास होता तो चार चने लाते।

चार में से एक चना चूहे को खिलाते ।

चूहे को खिलाते तो दाँत टूट जाता।

दाँत टूट जाता तो बड़ा मजा आता।

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