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गैल्वेनी सैल | गैल्वेनिक सेल क्या है? इसकी कार्यविधि को डेनियल सेल का उदाहरण देकर समझाइए

गैल्वेनी सेल क्या है, परिभाषा, उपयोग, कार्य (About Galvanic Cell In Hindi)

गैल्वेनी सैल के दो इलेक्ट्रॉड को किसी धातु के तार द्वारा जोड़ने पर, एक इलेक्ट्रॉड पर ऑक्सीकरण अभिक्रिया होती है, जिस ऐनोड कहते हैं और दूसरे इलेक्ट्रोड पर अपचयन अभिक्रिया होती है, उसे कैथोड कहते हैं। इन अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।

गैल्वेनी सैल के दो इलेक्ट्रोंड, दो अर्द्धसैल कहलाते हैं तथा इनके इलेक्ट्रॉडों पर होने वाली अभिक्रिया, अर्द्ध सैल अभिक्रिया कहलाती है। दोनों अर्द्ध सैल परस्पर लवण सेतु द्वारा जुड़े होते हैं।

गैल्वेनी सेल क्या है? इसकी कार्यविधि को डेनियल सेल का उदाहरण देकर समझाइए।

विद्युत रासायनिक सैल का निर्माण सर्वप्रथम ल्युगी गैल्वेनी (1780) और वोल्टा (1800) ने किया था। अतः इन्हें गैल्वेनी सैल और वोल्टीय सेल कहते हैं।

गैल्वेनी सेल के उदाहरण examples of galvanic cells

डेनियल सैल, ड्राई सैल, बैटरी आदि। इनमें डेनियल सैल और ड्राई सैल, प्राथमिक सैल कहलाते हैं, क्योंकि इन्हें पुनः चार्ज नहीं किया जा सकता है। बैटरी को द्वितीयक सैल कहते हैं, क्योंकि इसे विपरित दिशा में विद्युत धारा प्रवाहित करके, पुनः चार्ज किया जा सकता है।

  • डेनियल सेल एक गैल्वनी सैल है।

डेनियल सेल में होने वाली सम्पूर्ण उपापचयन अभिक्रिया है (The complete metabolic reaction that takes place in Daniel’s cell is)

Zn(s) + Cu2+ (aq) → Zn2+ (aq) + Cu(a)

इलेक्ट्रोडों पर होने वाली अभिक्रियायें निम्न हैं

Zn (s) → Zn 2+ (aq) + 2e −  एनोड पर (ऑक्सीकरण)

Cu 2+ (aq) + 2e − → Cu (s) कैथोड़ पर (अपचयन)

उपरोक्त दोनों अभिक्रियायें अर्द्धसेल अभिक्रिया या इलेक्ट्रोड़ अभिक्रिया कहलाती हैं।

लवण सेतु (Salt Bridge)

लवण सेतु एक U आकार की काँच की नली होती है, जिसमें अगर- अगर जैल, जिसको KCI द्वारा संतृप्त किया गया है, भरा होता है। नली के दोनों सिरों पर कॉटन का प्लग लगा होता है। सैल में प्रयुक्त करने में इसके सिरों को दो अलग-अलग पात्र में रखे विलयनों में रखा जाता है।

लवण सेतु के कार्य (Functions of Salt Bridge)

1. लवण सेतु आंतरिक सैल परिपथ को पूर्ण करता है। अर्थात् अलग अलग पात्र में रखे दोनों विलयनों को जोड़ता है।

2.लवण सेतु दोनों अर्द्धसैलों में विद्युत अपघट्यो की उदासीनता बनाए रखता है। एनोड पर इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात् अतिरिक्त धन आवेश को उदासीन करने के लिए लवण सेतु से CI की तुल्य मात्रा एनोड की ओर गमन करती है। इसी प्रकार कैथोड पर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों के आवेश को उदासीन करने के लिए K की तुल्य मात्रा कैथोड़ की ओर गमन करती है। इस प्रकार विद्युत अपघट्यों की उदासीनता बनी रहती है।

एक गैल्वनी सेल को व्यक्त करने के लिये कुछ नियम और परिपाटियाँ बनाई गई हैं। जिनका संक्षेप में वर्णन किया गया है।

 

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