informationक्रिप्टोकरेंसी क्या है पूरी जानकारी | what is cryptocurrency in Hindi 2021

क्रिप्टोकरेंसी क्या है पूरी जानकारी | what is cryptocurrency in Hindi 2021

Cryptocurrency kya h

क्रिप्टोकरेंसी क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल करेंसी ( मुद्रा ) होती है , जिसमें लेन – देन संबंधी सभी जानकारियों को कूटबद्ध ( Encrypt ) तरीके से विकेंद्रित डेटाबेस ( Decentrelised Database ) में सुरक्षित रखा जाता है । हालाँकि अभी तक ऐसी मुद्रा को किसी देश के केंद्रीय बैंक की मान्यता नहीं प्राप्त है , जिसके कारण इनकी वैधता या भविष्य को लेकर भय बना रहता है ।

• वर्तमान में विश्व भर में 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी प्रचलित हैं । पिछले दिनों सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक द्वारा घोषित लिब्रा के अतिरिक्त बिटकॉइन , एथरियम ( Ethereum ) आदि क्रिप्टोकरेंसी के कुछ उदाहरण हैं ।

क्रिप्टोकरेंसी के आविष्कार का मुख्य उद्देश्य वित्तीय लेन देन में बैंकों या अन्य बिचौलियों की भूमिका को बिल्कुल समाप्त करना था । सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया में लेन देन के विवरण बैंकों द्वारा सत्यापित किया जाता है जबकि क्रिप्टोकरेंसी में किये गए विनिमय को ब्लॉकचेन तकनीकी के माध्यम से कई देशों में फैले विकेन्द्रित डेटाबेस द्वारा सत्यापित किया जाता है ।

सन् 2009 में किसी समूह या व्यक्ति ने सतोशी नाकामोतो के छद्म नाम से ‘ बिटकोइन के नाम से पहली क्रिप्टोकरेंसी बनाई ।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ benefits of cryptocurrency

  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन के लिए बैंक या किसी अन्य बिचौलिये की भूमिका की आवश्यकता नहीं होती है, अतः इस माध्यम से बहुत ही कम खर्च में लेन-देन किया जा सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में व्यापार के लिये किसी भी प्रकार के प्रपत्र (पहचान-पत्र आदि) की आवश्यकता नहीं होती है, अतः कोई भी व्यक्ति इस प्रणाली के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र से जुड़ सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा लाभ इसकी गोपनीयता है, किसी प्रपत्र की अनिवार्यता के अभाव में लेन-देन के दौरान लोगों की निजी-जानकारी सुरक्षित रहती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग बिना कोई अतिरिक्त शुल्क दिये विश्व में किसी भी देश में किया जा सकता है। हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा के रूप में किसी भी देश द्वारा वैधानिकता प्रदान नहीं की गई है।

क्रिप्टोकरेंसी के दुष्परिणाम:

  • क्रिप्टोकरेंसी को किसी देश अथवा केंद्रीय बैंक की मान्यता नहीं प्राप्त होती जिससे इसके मूल्य की अस्थिरता का भय बना रहता है। उदाहरण के लिये दिसंबर 2017 में बिटकॉइन की कीमत 19 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक थी, जबकि दिसंबर 2018 में इसकी कीमत घटकर 3200 अमेरिकी डॉलर रह गई।
  • क्रिप्टोकरेंसी की गोपनीयता के कारण आतंकवादी या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में इसके प्रयोग का भय बना रहता है।
  • प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की मौद्रिक नीतियों का प्रभाव नहीं पड़ता, ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को बढ़ावा देना देश की अर्थव्यवस्था के लिये नुकसानदायक हो सकता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन के व्यवस्थित संचालन के लिये लाखों की संख्या में बड़े-बड़े कंप्यूटरों का उपयोग किया जाता है, जो ऊर्जा अपव्यय का एक बड़ा कारण है। उदाहरण के लिये जुलाई 2019 में जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ़ म्यूनिख (Technical University of Munich- TUM) के शोधकर्त्ताओं ने बिटकॉइन प्रणाली के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) के बारे में चिंताजनक आंकड़े जारी किये थे।
  • वर्तमान में जब विश्व के कई देश बहु-राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किये जा रहे कर अपवंचन (Tax Evasion) को रोकने के लिये प्रयासरत हैं तो ऐसे में विनियमन की किसी समायोजित नीति के अभाव में क्रिप्टोकरेंसी को अवैध मुद्रा के स्टेटस से बाहर रखना, कर अपवंचन रोकने के प्रयासों को और अधिक जटिल बना देगा।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य:

  • न्यायालय के आदेश के बाद देश में तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों, संबंधित नियामकों और अन्य हितधारकों के बीच क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श की पहल को बढ़ावा मिलेगा।
  • हालाँकि देश में क्रिप्टोकरेंसी की अनुमति देने और इसके विनियम हेतु नीति निर्माण में सरकार की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होगी। ध्यातव्य है कि जुलाई 2019 में प्रस्तुत क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019 के मसौदे में सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी।
  • क्रिप्टोकरेंसी पर चर्चा करते हुए इसके दो पहलुओं-‘निजी क्षेत्र द्वारा जारी मुद्रा (Private Currency)’ तथा इसमें उपयोग की जाने वाली तकनीकी ‘ब्लॉकचेन’ और विकेंद्रीकृत बही-खता तकनीकी (Distributed Ledger Technology-DLT) जैसे पक्षों को अलग-अलग समझना बहुत ही आवश्यक है।
  • क्रिप्टोकरेंसी के अध्ययन के लिये गठित समिति ने जहाँ किसी प्राइवेट करेंसी का विरोध किया है, वहीं समिति ने RBI तथा सरकार को ‘ब्लॉकचेन’ व DLT के प्रति सकारात्मक रवैया रखने तथा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रयोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने की सिफारिश की है।
    • उदाहरण के लिये दक्षिण भारत के कुछ राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल आदि) में सरकार के विभिन्न विभागों में सुरक्षित रूप से आँकड़ों (Data) को एकत्र एवं संरक्षित रखने के लिये ‘ब्लॉकचेन’ पर कई प्रयोग किये जा रहे हैं तथा ‘ब्लॉकचेन’ में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने के लिये केरल ब्लॉकचेन अकादमी (Kerala Blockchain Academy) की स्थापना जैसे प्रयास किये जा रहे हैं।

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