Educationकोशिका किसे कहते है | कोशिका सिद्धांत, संरचना, प्रकार,भाग, खोज

कोशिका किसे कहते है | कोशिका सिद्धांत, संरचना, प्रकार,भाग, खोज

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कोशिका क्या है, कोशिका क्या है कोशिका की खोज किसने की थी

जीवन की आधारभूत इकाई जीव कोशिका की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति है। सभी जीवधारी कोशिकाओं से बने होते हैं। कोशिका सभी जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। कुछ जीव एक कोशिका के बने होते हैं जिन्हें एक कोशिकीय (Unicellular) जीव कहते हैं ; जैसे अमीबा, यीस्ट, बैक्टीरिया, क्लेडोमोनास आदि। कुछ जीव अनेक कोशिकाओं का बना होता है उसे बहुकोशिकीय (Multi – Cellular) जीव कहते हैं ; जैसे- मनुष्य, गाय, वृक्षों आदि।

कोशिकाओं की आकृति व आकार वास्तव में उनके द्वारा संपन्न विशेष कार्य से संबंधित होते हैं, जबकि उनकी संख्या शरीर व अंगों का आकार बढ़ाने के लिए होती है। अतः छोटे जीवों में कोशिकाएँ सीमित संख्या में होती हैं , बड़ों (जैसे हाथी , ह्वेल या वट वृक्ष) में इनकी संख्या अनगिनत होती है। उदाहरण स्वरूप मनुष्य में कोशिकाओं की संख्या लगभग 100 खरब (104) आंकी जाती है।

  • लैटिन भाषा में कोशिका (Cell) शब्द का अर्थ ‘ छोटा कमरा ‘ होता है।
  • एक कोशिका एक प्राणदायक पदार्थ जीव द्रव्य (प्रोटोप्लेज्म) से बनी होती है। जीव द्रव्य बहुत विभिन्न प्रकार के रासायनिक अणुओं का एक समूह है। इनमें से अधिकतर कार्बनिक अणु हैं जैसे प्रोटी , कार्बोहाइड्रेट, वसा, न्यूक्लीक अम्ल आदि।
  •  कोशिकाएं पहली बार 1665 ई. में राबर्ट हुक (एक अंग्रेज वैज्ञानिक) द्वारा खोजी गई। एक आद्य सूक्ष्मदर्शी की सहायता से उसने एक कार्क के टुकड़े (कतले) में कोशिकाएँ देखीं।
  • ल्यूवेनहॉक (1674 ई.) ने सुधरी किस्म के सूक्ष्मदर्शी के साथ पहली बार बैक्टीरिया के रूप में मुक्त कोशिकाएँ खोजी।
  • राबर्ट ब्राउन ने 1831 ई. में कोशिका में केंद्रक की खोज की।
  • 1939 में जे. ई. परकिंजे ने कोशिका के जीवित पदार्थ को प्रोटोप्लैज्म (जीव द्रव्य) का नाम दिया।

कोशिका सिद्धान्त (Cell theory)

  • 1838 ई. में एक जर्मन वनस्पति- वैज्ञानिक जैकब स्लाइडेन (Jakob Schleiden) ने कहा कि पौधे का शरीर सूक्ष्म कोशिकाओं का बना होता है एवं प्रत्येक कोशिका एक इकाई (Unit) है।
  • प्राणीविज्ञान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक ‘ श्वान ‘ (Schwann) ने 1839 ई. में कहा कि जंतु का शरीर भी सूक्ष्म कोशिकाओं का बना है।
  • स्लाइडेन और श्वान ने इन दोनों मतों को मिलाकर कोशिका मतवाद (Cell theory) की घोषणा की। यह मत निम्नलिखित बातों से व्यक्त किया जा सकता है

( i ) प्रत्येक जीव की उत्पत्ति एक कोशिका से होती है।

( ii ) प्रत्येक जीव का शरीर एक या अनेक कोशिकाओं का बना होता है ।

( iii ) प्रत्येक कोशिका एक स्वाधीन इकाई है , तथापि सब कोशिकाएँ – मिलकर काम करती हैं . फलस्वरूप एक जीव का निर्माण होता है ।

( iv ) कोशिका का निर्माण जिस क्रिया से होता है, उसमें केन्द्रक मुख्य कार्यकर्ता (creator) होता है।

  • स्लाइडेन एवं श्वान ने कोशिका सिद्धांत के माध्यम से यह बताने में असफल रहे कि नई कोशिकाओं का निर्माण कैसे होता है। पहली बार रडोल्फ विचर्चा (1855 ई.) ने स्पष्ट किया कि कोशिका विभाजित होती है और नई कोशिकाओं का निर्माण पूर्व स्थित कोशिकाओं के विभाजन से होता है इन्होंने स्लाइडेन एवं श्वान की कल्पना को रूपांतरित कर नई कोशिका सिद्धांत को प्रतिपादित किया। वर्तमान समय के कोशिका सिद्धांत निम्नवत हैं
  1. सभी जीव कोशिका एवं कोशिका उत्पादन से बने होते हैं।
  2. सभी कोशिकाएँ पूर्व स्थित कोशिकाओं से निर्मित होती हैं।

कोशिका संरचना (Cell structure)

  • कोशिकाएँ विभिन्न आकार की होती हैं, जैसे बेलनाकार, अण्डाकार, गोलाकार, लम्बवत् इत्यादि।
  • सभी कोशिकाओं के तीन मुख्य अंग होते हैं – कोशिका झिल्ली (Cell membrane), केन्द्रक (Nucleus) और कोशिका द्रव्य (Nucleoplasm)

कोशिका किसे कहते है

कोशिका किसे कहते है

पादप कोशिका

कोशिका झिल्ली (Cell Membrane)

  • यह जीव द्रव्य के लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती है।
  • जंतु कोशिका की यह सबसे बाहरी परत होती है जबकि पादप कोशिका में इस झिल्ली के बाहर एक अन्य मोटी परत पाई जाती है। इस परत को कोशिका – भित्ति (Cell wall) कहा जाता है।
  • यह प्रायः सेल्यूलोस (Cellulose) की बनी होती है
  • पौधों को हमेशा वायुमंडलीय ताप का सामना करना पड़ता है।
  • वे प्राय: अपनी जगह स्थिर रहते हैं। इन सबों के कारण पादप कोशिका को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए ही कोशिका झिल्ली के बाहर कोशिका – भित्ति (Cell Wall) पाई जाती है।
  • कोशिका झिल्ली कोशिका को निश्चित आकृति प्रदान करती है।
  • यह कोशिका के अंदर की रचनाओं को सुरक्षा प्रदान करती है। यह एक कोशिका को दूसरे कोशिका से पृथक करती है।
  • यह चयनात्मक पारगम्य या अर्धपारगम्य (Selective or Semipermeable) झिल्ली होती है जिसके कारण यह केवल ऐच्छिक पदार्थों को कोशिका के अंदर आने देती है तथा हानिकारक उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालती है।
  • कवक , शैवालों एवं विकसित हरे पौधों की भित्ति सेल्यूलोज (Cellulose) की बनी होती है, जबकि जीवाणुओं एवं कवकों की कोशिकाभित्ति कार्बोहाइड्रेट की बनी होती है।

केंद्रक

  • कोशिका के बीच एक गोल, गाढ़ी (dense) संरचना पाई जाती है जिसे केंद्रक या न्यूक्लियस (Nucleus) कहते हैं।
  • सभी जीवित कोशिकाओं में केंद्रक मौजूद रहता है।
  • इसके चारों ओर दोहरे परत की एक झिल्ली रहती है जिसे केंद्रक कला या केंद्रक झिल्ली (Nuclear membrane) कहते हैं। यह झिल्ली लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती है।
  • केन्द्रक झिल्ली में अनेक सूक्ष्म छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें केंद्रक – रंध्र (nuclear pure) कहा जाता है। इन छिद्रों के द्वारा केंद्रक द्रव्य एवं कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों का आदान – प्रदान होता है।
  • केंद्रक के अन्दर गाढ़ा, अर्द्धतरल द्रव्य भरा रहता है, जिसे केंद्रकद्रव्य या न्यूक्लियोप्लाज्म (Nucleoplasm) कहते हैं।
  • केंद्रक द्रव्य में महीन धागों की जाल जैसी रचना पाई जाती है, जिसे क्रोमेटिन जालिका (Chromatin network) कहते हैं। ये डिऑक्सीराइबोस न्यूक्लिक अम्ल (D.N.A.) एवं प्रोटीन से बने होते हैं।
  • DNA आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक ले जाता है।
  • कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिन जालिका के धागे अलग होकर कई छोटी और मोटी छड़ जैसी रचनाओं में बदल जाते हैं, जिन्हें गुणसूत्र या क्रोमोसोम (Chromosomes  कहते हैं।
  • DNA अणु में कोशिका के निर्माण एवं संगठन की सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं।
  • DNA के क्रियात्मक खंड को जीन (Gene) कहते हैं। ये जीन पैतृक गुणों के वाहक होते हैं, अत: DNA को आनुवंशिक पदार्थ तथा जीन को आनुवंशिक इकाई (Hereditary unit) कहते हैं।

केंद्रक के कार्य

1. केंद्रक कोशिका की रक्षा करता है और कोशिका विभाजन में भाग लेता है। केंद्रक की अनुपस्थिति में कोशिका विभाजन संभव नहीं है।

2. केंद्रक कोशिका के भीतर संपन्न होने वाली सभी उपापचयी (metabolic) या जैविक तथा रासायनिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

3. कुछ जीवों में कोशिकीय जनन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. यह कोशिका के विकास एवं परिपक्वन को निर्धारित करता है ।

5. केंद्रक प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक कोशिकीय आर . एन . ए ( RNA ) उत्पन्न करते हैं ।

• राबर्ट ब्राउन ने सन 1831 ई . में कोशिका में केंद्रक की खोज की । केंद्रक सभी कोशिकीय गतिविधियों का नियंत्रण केंद्र है ।

  • पैरामिशियम की कोशिका में दो केंद्रक तथा राइजोपस की कोशिका में अनेक केंद्रक पाए जाते हैं ।
  • प्राय : स्तनधारी जीवों की लाल रक्त कोशिकाओं ( red blood cells ) में केंद्रक अनुपस्थित होता है । परंतु ऊँट ( Camel ) की RBCs में केन्द्रक उपस्थित होता है ।

note –

  • सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्म गैलिसेप्टिकम ( Mycoplasma gallisepticum ) की होती है ।
  • सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग पक्षी के अंडे ( Ostrich’s egg ) की होती है , जिसकी लम्बाई 175 मिमी . होती है ।
  • सबसे लम्बी कोशिका तंत्रिका तंत्र ( न्यूरॉन ) की होती है ।

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