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कंप्यूटर का परिचय | कंप्यूटर का परिचय और इतिहास | कंप्यूटर पर निबंध 2021

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वर्तमान युग कंप्यूटर एज ( Age ) के रूप में जाना जाता है । घर हो या दफ्तर हर जगह कम्प्यूटर मौजूद है । कम्प्यूटर की मदद से विभिन्न काम जैसे नौकरी की तलाश , किसी उत्पाद के बारे में जानकारी हासिल करना , शिक्षा संबंधी कार्य या फिर कहीं घूमने की योजना तैयार करना आसानी से किये जा सकते हैं ।

हम आज कम्प्यूटर का इस्तेमाल संवाद के साधन के रूप में करते हैं । यह संचार , मात्र लिखित रूप तक ही सीमित नहीं है बल्कि आधुनिक तकनीक की बदौलत कम्प्यूटर के द्वारा , ध्वनियां , विडियो और ग्राफिक्स भी भेजे जा सकते हैं । घर में निजी कम्प्यूटर की मद्द से आप अपनी चेक बुक का लेखा – जोखा , बिलों का भुगतान , आय और खर्चों का हिसाब , पैसे स्थानांतरण , स्टॉक की खरीददारी आदि काम आसानी से कर सकते हैं । ए.टी.एम. ( ऑटोमेटेड टेलर मशीन ) मशीन के जरिए पैसा निकाल सकते हैं ।

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कंप्यूटर का इतिहास history of computer in hindi

• यांत्रिक कैलकुलेटर का उद्गम दो गणितज्ञों ब्लेज पास्कल ( 1623-62 ) और गॉटफ्रीड विल्हेम लेबिट्ज़ ( 1646-1716 ) के कार्यों में खोजा जा सकता है ।

• लेकिन चार्ल्स बैबेज ( 1792-1871 ) ने जॉन नेपियर ( 1550-1617 ) द्वारा खोजे गए लघुगणक अंकणों को समाहित कर सकने वाली कैलकुलेटिंग मशीन बनाने का विचार किया था ।

• इसलिए चार्ल्स बैबेज को कम्प्यूटर के जनक रूप में भी जाना जाता है ।

कंप्यूटर क्या है ? what is computer in hindi

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो डाटा तथा निर्देशों को इनपुट के रूप में ग्रहण करता है , उनका विश्लेषण करता है तथा आवश्यक परिणामों को निश्चित प्रारूप में आउटपुट के रूप में निर्गत करता है । यह डाटा के भंडारण ( stor age ) तथा तीव्र गति और त्रुटि रहित ढंग से उसके विश्लेषण का कार्य करता है । ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार , ” कम्प्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रानिक मशीन है , जो अनेक प्रकार की तर्कपूर्ण गणनाओं के लिए प्रयोग किया जाता है । ” कम्प्यूटर वह मशीन है जो डाटा स्वीकार करता है , उसे भंडारित करता है , दिए गए निर्देशों के अनुरूप उनका विश्लेषण करता है तथा विश्लेषित परिणामों को आवश्यकतानुसार निर्गत करता है ।

कंप्यूटर की विशेषता ( Characteristics of Computer in hindi )

1. गति ( Speed ) : कम्प्यूटर एक सेकेण्ड में लाखों गणनाएं कर सकता है । किसी मनुष्य द्वारा पूरे वर्ष में किए जाने वाले कार्य को कम्प्यूटर कुछ ही सेकेण्ड में कर सकता है । कंप्यूटर प्रोसेसर के स्पीड को हर्ट्स ( Hz ) में मापते हैं । वर्तमान समय में कम्प्यूटर नैनो सेकेण्ड ( 109 सेकेण्ड ) में गणनाएं कर सकता है ।

2.स्वचालित ( Automatic ) : कम्प्यूटर एक स्वचालित मशीन है जिसमें गणना के दौरान मानवीय हस्तक्षेप की संभावना नगण्य रहती है । हालांकि कम्प्यूटर को कार्य करने के निर्देश मनुष्य द्वारा ही दिए जाते हैं , पर एक बार आदेश दिये जाने के बाद वह बिना रुके कार्य कर सकता है ।

3. त्रुटि रहित कार्य ( Accuracy ) : कम्प्यूटर की गणनाएं लगभग त्रुटिरहित होती है । गणना के दौरान अगर कोई त्रुटि ( error ) पायी भी जाती है तो वह प्रोग्राम या डाटा में मानवीय गलतियों के कारण होती है । अगर डाटा और प्रोग्राम सही है तो कम्प्यूटर हमेशा सही परिणाम ही देता है । कभी – कभी वायरस ( Virus ) के कारण भी कम्प्यूटर में त्रुटियां आ जाती है ।

4. स्थायी भंडारण क्षमता ( Permanent Storage ) : कम्प्यूटर में प्रयुक्त मेमोरी को डाटा , सूचना और निर्देशों के स्थायी भंडारण के लिए प्रयोग किया जाता है । चूंकि कम्प्यूटर में सूचनाएं इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संग्रहित की जाती है , अतः सूचना के समाप्त होने की संभावना कम रहती है ।

5. विशाल भंडारण क्षमता ( Large Stor age Capacity ) : कम्प्यूटर के बाह्य ( ex ternal ) तथा आंतरिक ( internal ) संग्रहण माध्यमों ( हार्ड डिस्क , फ्लापी डिस्क , मैग्नेटिक टेप , सीडी रॉम ) में असीमित डाटा और सूचनाओं का संग्रहण किया जा सकता है । कम्प्यूटर में सूचनाएं कम स्थान घेरती हैं , अत : इसकी भंडारण क्षमता विशाल और असीमित है ।

6. भंडारित सूचना को तीव्रगति से प्राप्त करना ( Fast Retrieval ) : कम्प्यूटर प्रयोग द्वारा कुछ ही सेकेण्ड में भंडारित सूचना में से आवश्यक सूचना को प्राप्त किया जा सकता है । रैम ( RAM – Random AC cess Memory ) के प्रयोग से वह काम और भी सरल हो गया है।

7. जल्द निर्णय लेने की क्षमता ( guick Decision ) : कम्प्यूटर परिस्थितियों का विश्लेषण कर पूर्व में दिए गए निर्देशों के आधार पर तीव्र निर्णय की क्षमता रखता है।

8. विविधता ( Versatility ) : कम्प्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के कार्य संपन्न किये जा सकते हैं । आधुनिक कम्प्यूटरों में अलग – अलग तरह के कार्य एक साथ करने की क्षमता है ।

9. पुनरावृत्ति ( Repetition ) : कम्प्यूटर को आदेश देकर एक ही तरह के कार्य बार – बार समान विश्वसनीयता और तीव्रता से कराये जा सकते हैं ।

10. स्फूर्ति ( Agility ) : कम्प्यूटर एक मशीन होने के कारण मानवीय दोषों से रहित है । इसे थकान तथा बोरियत महसूस नहीं होती है और हर बार समान क्षमता से कार्य करता है ।

11. गोपनीयता ( Secrecy ) : पासवर्ड ( Pass word ) के प्रयोग द्वारा कम्प्यूटर के कार्य को गोपनीय बनाया जा सकता है । पासवर्ड के प्रयोग से कम्प्यूटर में रखे डाटा और कार्यक्रमों को केवल पासवर्ड जानने वाला व्यक्ति ही देख या बदल सकता है ।

12. कार्य की एकरूपता ( Uniformity of work ) : बार – बार तथा लगातार एक ही कार्य करने के बावजूद कम्प्यूटर के कार्य की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता

कम्प्यूटर की सीमाएं ( Limitations of the Computer in hindi )

1. बुद्धिहीन ( No mind ) : कम्प्यूटर में स्वयं की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती । यह केवल दिए गए दिशा – निर्देशों के अंदर ही कार्य कर सकता है ।

2. खर्चीला ( Expensive ) : कम्प्यूटर के हॉर्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर काफी महंगे होते हैं तथा इन्हें समय समय पर आवश्यकतानुसार परिवर्तित भी करना पड़ता है ।

3. वायरस का खतरा ( Immune to virus ) : कम्प्यूटर में वायरस का खतरा बना रहता है जो सूचना और निर्देशों को दूषित या समाप्त कर सकता है । ये वायरस कम्प्यूटर की भंडारण क्षमता को भी प्रभावित करते हैं । हालांकि एंटीवायरस सॉफ्टवेयर ( Anti Virus ) का प्रयोग कर इससे बचा जा सकता है ।

4. विद्युत पर निर्भरता ( Depends on Electricity ) : कम्प्यूटर अपने कार्य के लिए विद्युत पर निर्भर करता है तथा इसके अभाव में कोई भी कार्य संपन्न कर पाने में सक्षम नहीं है ।

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग ( Applications of Computer in hindi )

कम्प्यूटर का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है । वर्तमान में , शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ कम्प्यूटर का प्रयोग नहीं किया जा रहा है । निम्नलिखित क्षेत्रों में कम्प्यूटर का विभिन्न अनुप्रयोग किया जा रहा है

1. डाटा प्रोसेसिंग ( Data Processing ) : बड़े और विशाल सांख्यिकीय डाटा से सूचना तैयार करने में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है । जनगणना , सांख्यिकीय विश्लेषण , परीक्षाओं के परिणाम आदि में इसका प्रयोग किया जा रहा है ।

2. सूचनाओं का आदान – प्रदान ( Exchange of Information ) : भंडारण की विभिन्न पद्धतियों के विकास और कम स्थान घेरने के कारण ये सूचनाओं के आदान – प्रदान के बेहतर माध्यम साबित हो रहे हैं । इंटरनेट के विकास ने तो इसे ‘ सूचना का राजमार्ग ‘ ( Information Highway ) बना दिया है ।

3. शिक्षा ( Education ) : मल्टीमीडिया ( Multimedia ) के विकास और कम्प्यूटर आधारित शिक्षा ने इसे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना दिया है । डिजिटल लाइब्रेरी ने पुस्तकों की सर्वसुलभता सुनिश्चित की है ।

4. वैज्ञानिक अनुसंधान ( Scientific Re search ) : विज्ञान के अनेक जटिल रहस्यों को सुलझाने में कम्प्यूटर की सहायता ली जा रही है । कम्प्यूटर में परिस्थितियों का उचित आकलन भी संभव हो पाता है ।

5. रेलवे और वायुयान आरक्षण ( Rail way and Airlines Reservation ) : कम्प्यूटर की सहायता से किसी भी स्थान से अन्य स्थानों के रेलवे और वायुयान के टिकट लिए जा सकते हैं तथा इसमें गलती की संभावना भी नगण्य है ।

6. बैंक ( Bank ) : कम्प्यूटर के अनुप्रयोग ने बैंकिंग क्षेत्र में क्रांति ला दी है । एटीएम तथा ऑनलाइन बैंकिंग , चेक के भुगतान , रुपया गिनना तथा पासबुक इंट्री में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है ।

7. चिकित्सा ( Medicine ) : शरीर के अंदर के रोगों का पता लगाने , उनका विश्लेषण और निदान में कम्प्यूटर का विस्तृत प्रयोग हो रहा है । सीटी स्कैन , अल्ट्रासाउंड , एक्स – रे तथा विभिन्न जाँच में कम्प्यूटर का प्रयोग हो रहा है ।

8. रक्षा ( Defence ) : रक्षा अनुसंधान , वायुयान नियंत्रण , मिसाइल , राडार आदि में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है ।

9. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ( Space Technology ) : कंप्यूटर की तीव्र गणना क्षमता के कारण ही ग्रहों , उपग्रहों और अंतरिक्ष की घटनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया जा सकता है । कृत्रिम उपग्रहों में भी कम्प्यूटर का विशेष प्रयोग हो रहा है ।

10. संचार ( Communication ) : आधुनिक संचार व्यवस्था कम्प्यूटर के प्रयोग के बिना संभव नहीं है । टेलीफोन और इंटरनेट ने संचार क्रांति को जन्म दिया है । तंतु प्रकाशिकी संचरण ( Fiber optics communication ) में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है ।

11. उद्योग व व्यापार ( Industry & Business ) : उद्योगों में कम्प्यूटर के प्रयोग से बेहतर गुणवत्ता वाले वस्तुओं का उत्पादन संभव हो पाया है । व्यापार में कार्यों और स्टॉक का लेखा – जोखा रखने में कम्प्यूटर सहयोगी सिद्ध हुआ है ।

12. मनोरंजन ( Recreation ) : सिनेमा , टेलीविजन के कार्यक्रम , वीडियो गेम में कम्प्यूटर का उपयोग कर प्रभावी मनोरंजन प्रस्तुत किया जा रहा है । मल्टीमीडिया के प्रयोग ने कम्प्यूटर को मनोरंजन का उत्तम साधन बना दिया है।

13. प्रकाशन ( Publishing ) : प्रकाशन और छपाई में कम्प्यूटर का प्रयोग इसे सुविधाजनक तथा आकर्षक बनाता है । रेखाचित्रों और ग्राफ का निर्माण अब सुविधाजनक हो गया है ।

14. प्रशासन ( Administration ) : प्रशासन में पारदर्शिता लाने , सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाने तथा विभिन्न प्रशासनिक तंत्रों में बेहतर तालमेल के लिए ई – प्रशासन ( e – governance ) का उपयोग कम्प्यूटर की सहायता से ही संभव हो पाया है ।

15. डिजिटल पुस्तकालय ( Digital Library ) : पुस्तकों को अंकीय स्वरूप प्रदान कर उन्हें अत्यंत कम स्थान में अधिक समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है । इसे इंटरनेट से जोड़ देने पर किसी भी स्थान से पुस्तकालय में संग्रहित सूचना को प्राप्त किया जा सकता है ।

आजकल शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा , जिसमें कम्प्यूटर का प्रयोग नहीं किया जा रहा है । पर्यावरण , पुस्तकालय , यातायात , पुलिस प्रशासन , मौसम विज्ञान , संगीत , चित्रकला ज्योतिष , इंजीनियरिंग डिजाइन आदि अनेक क्षेत्रों में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है ।

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग के प्रभाव (effects of computer applications in hindi )

1. समय की बचत : चूंकि कम्प्यूटर के कार्य करने की गति अत्यंत तीव्र है , अतः मनुष्य द्वारा एक वर्ष में पूरा किए जाने वाले कार्यों को कम्प्यूटर की सहायता से कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है ।

2. त्रुटि रहित कार्य : कंप्यूटर के प्रयोग से कार्य में त्रुटि की संभावना नगण्य हो जाती है । जो त्रुटि होती भी है , वह गलत डाटा या गलत प्रोग्राम का परिणाम है जिसे पहचान कर सही किया जा सकता है ।

3. कार्य की गुणवत्ता : चूंकि कम्प्यूटर हर बार समान गुणवत्ता से कार्य करता है , अत : बार – बार एक ही कार्य को करने के पश्चात् भी उत्पाद की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं होता है ।

4. कागज की बचत : डाटा संग्रहण के इलेक्ट्रॉनिक विधियों के उपयोग और उनकी विशाल भंडारण क्षमता के कारण कम्प्यूटर के प्रयोग से कागज की बचत संभव हो पाती है ।

5. बेरोजगारी : यह कम्प्यूटर के विस्तृत अनुप्रयोग का एक नकारात्मक प्रभाव है । एक कम्प्यूटर द्वारा सैकड़ों लोगों का कार्य किया जा सकता है जिससे लोगों की जीविका पर प्रभाव पड़ता है । परन्तु वैकल्पिक व्यवस्था और समुचित विकास द्वारा इस पर काबू पाया जा सकता है । दूसरी तरफ , कम्प्यूटर से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार का सृजन भी किया जा सकता है ।

कम्प्यूटर का वर्गीकरण computer classification in hindi

पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर ( First Generation Computers in hindi 1942-1955 )

  • इसमें निर्वात ट्यूब ( Vacuum Tubes ) का प्रयोग किया गया ।
  • इनमें मशीन भाषा ( Machine Language ) का प्रयोग किया गया । भंडारण के लिए पंचकार्ड का प्रयोग किया गया।
  • ये आकार में बड़े ( Bulky ) और अधिक ऊर्जा खपत करने वाले थे ।
  •  एनिएक ( ENIAC ) , यूनीबैक ( UNIVAC ) तथा आईबीएम ( IBM ) के मार्क- I इसके उदाहरण हैं ।
  • 1952 में डॉ ० ग्रेस हापर द्वारा असेम्बल भाषा ( Assembly Language ) के आविष्कार से प्रोग्राम लिखना कुछ आसान हो गया ।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर ( Second Generation Computers in hindi 1955-1964 )

  • निर्वात ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया जो हल्के , छोटे और कम विद्युत खपत करने वाले थे ।
  • इनकी गति तीव्र और त्रुटियां कम थी ।
  • पंचकार्ड की जगह चुम्बकीय भंडारण उपकरणों ( Magnetic Storage De vices ) का प्रयोग किया गया जिससे भंडारण क्षमता और गति में वृद्धि हुई ।
  • व्यवसाय तथा उद्योग में कम्प्यूटर का प्रयोग आरंभ हुआ ।
  • बैच आपरेटिंग सिस्टम ( Batch operat ing System ) का आरंभ किया गया ।
  • साफ्टवेयर में कोबोल ( COBOL – Com mon Business Oriented Lan guage ) और फोरट्रान ( FORTRAN ) जैसे फोरट्रान जैसे उच्च स्तरीय भाषा का विकास आईबीएम द्वारा किया गया । इससे प्रोग्राम लिखना आसान हुआ ।

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर ( Third Generation Computers in hindi 1964-1975 )

  • ट्रांजिस्टर की जगह इंटीग्रेटेड सर्किट ( IC Integrated Circuit ) का प्रयोग शुरू हुआ जिसमें सैकड़ों इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे ट्रांजिस्टर , प्रतिरोधक और संधारित्र ( Capacitor ) एक छोटे चिप पर बने होते हैं ।
  • प्रारंभ में SSI ( Small Scale Integra tion ) और बाद में MSI ( Medium Scale Integration ) का प्रयोग किया गया ।
  • इस पीढ़ी के कम्प्यूटर हल्के , कम खर्चीले तथा तीव्र थे और अधिक विश्वसनीय थे ।
  • चुम्बकीय टेप और डिस्क के भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई ।
  • रैम ( RAM – Random Access Memory ) के कारण गति में वृद्धि हुई ।
  • उच्च स्तरीय भाषा में पीएल -1 ( PL / 1 ) , पास्कल ( PASCAL ) तथा बेसिक ( BASIC ) का विकास हुआ ।
  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ( Time Sharing Operating System ) का विकास हुआ ।
  • हॉर्डवेयर और सॉफ्टवेयर की अलग – अलग बिक्री प्रारंभ हुई । इससे उपयोगकर्ता आवश्यकतानुसार सॉफ्टवेयर ले सकता था ।
  • 1965 में डीइसी ( DEC – Digital Equip ment Corporation ) द्वारा प्रथम व्यवसायिक मिनी कम्प्यूटर ( Mini Com puter ) पीडीपी -8 ( Programmed Data Processor – 8 ) का विकास किया गया ।

चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर ( Fourth Generation Computers in hindi 1975-1989 )

  • एलएसआई ( LSI – Large Scale Inte gration ) तथा बीएलएसआई ( VISI – Very Large Scale Integration ) चिप तथा माइक्रो प्रोसेसर के विकास से कंप्यूटर के आकार में कमी तथा क्षमता में वृद्धि हुई ।
  • माइक्रो प्रोसेसर का विकास एम . ई . हौफ ने 1971 में किया । इससे व्यक्तिगत कम्प्यूटर ( Personal Computer) का विकास हुआ ।
  • चुम्बकीय डिस्क और टेप का स्थान अर्धचालक ( Semiconductor ) मेमोरी ने ले लिया । रैम ( RAM ) की क्षमता में वृद्धि से कार्य अत्यंत तीव्र हो गया ।
  • उच्च गति वाले कंप्यूटर नेटवर्क ( Net work ) जैसे लैन ( LAN ) व वैन ( WAN ) का विकास हुआ ।
  • समानान्तर कम्प्यूटिंग ( Parallel Comput ing ) तथा मल्टीमीडिया का प्रचलन प्रारंभ हुआ ।
  • 1981 में आईबीएम ( IBM ) ने माइक्रो कंप्यूटर का विकास किया जिसे पीसी ( PC – Personal Computers ) कहा गया ।
  • सॉफ्टवेयर में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस ( GUI Graphical User Interface ) के विकास ने कम्प्यूटर के उपयोग को सरल बना दिया ।
  • आपरेटिंग सिस्टम में एम.एस. डॉस ( MS DOS ) , MS – Windows तथा एप्पल ऑपरेटिंग सिस्टम ( Apple OS) का विकास हुआ
  • उच्च स्तरीय भाषा में “ C ” भाषा का विकास हुआ जिसमें प्रोग्रामिंग सरल था ।
  • उच्च स्तरीय भाषा का मानकीकरण किया गया ताकि किसी प्रोग्राम को सभी कम्प्यूटर में चलाया जा सके ।

पाँचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर ( Fifth Generation Computers in hindi 1989 – अब तक )

  • यूएलएसआई ( ULSI – Ultral Large Scale Integration ) के विकास से करोड़ों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चिप पर लगाया जा सका । आप्टिकल डिस्क ( Optical disk ) जैसी सीडी के विकास ने भंडारण क्षेत्र में क्रांति ला दी।
  • नेटवर्किंग के क्षेत्र में इंटरनेट ( Internet ) , ई – मेल ( e – mail ) तथा डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू ( www – world wide web ) का विकास हुआ ।
  • सूचना प्रौद्योगिकी ( Information Tech nology ) तथा सूचना राजमार्ग ( Infor mation Highway ) की अवधारणा का विकास हुआ ।
  • नये कंप्यूटर में कृत्रिम ज्ञान क्षमता ( Arti ficial Intelligence ) डालने के प्रयास चल रहे हैं ताकि कम्प्यूटर परिस्थितियों के अनुकूल स्वयं निर्णय ले सके ।
  • मैगनेटिक बबल मेमोरी ( Magnetic Bubble Memory ) के प्रयोग से भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई ।
  • पोर्टेबल पीसी ( Portable PC ) और डेस्क टॉप पीसी ( Desktop PC ) ने कम्प्यूटर को जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र से जोड़ दिया ।

अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर ( Next Generation Computer in hindi )

नैनो कम्प्यूटर ( Nano Computer ) : नैनो ट्यूब्स जिनका व्यास । नैनो मीटर 1×10-9 मी . तक हो सकता है , के प्रयोग से अत्यंत छोटे व विशाल क्षमता वाले कंप्यूटर के विकास की परिकल्पना की गई है ।

क्वांटम कम्प्यूटर ( quantum Computer ) : विद्युतीय किरणों में ऊर्जा इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण होती है। ये इलेक्ट्रान अपने कक्ष में तेजी से भ्रमण करते हैं । इस कारण इन्हें एक साथ 1 और 0 की स्थिति में गिना जा सकता है । इस क्षमता का इस्तेमाल कर मानव मस्तिष्क से भी तेज कार्य करने वाले कंप्यूटर के विकास का प्रयास चल रहा है ।

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